
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
लखनऊ: राजधानी में प्राइवेट डग्गामार बसों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही। नहरिया चौराहा और ट्रांसपोर्ट नगर जैसे प्रमुख स्थानों से चल रही ये बसें न सिर्फ यात्रियों की जान जोखिम में डाल रही हैं, बल्कि सरकार को भी राजस्व का चूना लगा रही हैं।
बसों के ऊपर सामान की भरमार और अंदर यात्रियों की गैरकानूनी ठूंसी गई भीड़ साफ बताती है कि कैसे चंद पैसों के लालच में लोगों की सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है। वहीं, @uptransportdept और संबंधित विभागीय अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं, जो गंभीर सवाल खड़े करता है।
सरकारी बसों में घाटे का बहाना बना निजी ऑपरेटरों को छूट देना, आम जनता की जान के साथ खिलवाड़ के बराबर है। इस पूरे नेटवर्क में राजस्व चोरी भी बड़े पैमाने पर हो रही है, जिसकी जानकारी @ComtaxU और @UPGST को दी जा चुकी है।
शासन-प्रशासन की लचर कार्यशैली और मौन स्वीकृति से डग्गामारी करने वालों के हौसले बुलंद हैं। अब जरूरत है कि सिर्फ दया नहीं, बल्कि कठोरतम कार्रवाई की जाए — ताकि सड़क पर चल रहे हर “मासूम यात्री” की जान की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
माननीय मुख्यमंत्री @myogiadityanath, परिवहन मंत्री @dayashankar4bjp और संबंधित अधिकारियों से अपील है कि इस पर त्वरित और सख्त कदम उठाएं।
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