
-सुजानपुरा में एलडीए जोन-2 के भ्रष्ट तंत्र का खुला संरक्षण, रसूखदार बिल्डर के आगे पंगु हुआ प्राधिकरण का बुलडोजर
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
लखनऊ। राजधानी लखनऊ का आलमबाग क्षेत्र इन दिनों स्थापत्य कला के एक ऐसे चमत्कार का गवाह बन रहा है, जिसे देखकर दुनिया भर के इंजीनियर अपनी डिग्रियां फाड़ सकते हैं। सुजानपुरा इलाके की एक अदनी सी, महज 12 फीट चौड़ी रिहायशी गली में लखनऊ विकास प्राधिकरण के प्रवर्तन जोन-2 के अधिकारियों के अंधे और बहरे संरक्षण में एक आलीशान पांच मंजिला इमारत खड़ी हो गई है। आम जनता जहां एक खिड़की का छज्जा छह इंच बाहर निकाल ले तो एलडीए का दस्ता बुलडोजर लेकर मुस्तैद हो जाता है, वहीं सुजानपुरा में नियमों की धज्जियां उड़ाकर आसमान छूती इस इमारत को देखकर ऐसा लगता है जैसे एलडीए के भ्रष्ट तंत्र ने अपनी आंखों पर महीने की बंधी-बंधाई कमाई की पट्टी बांध रखी है।
इस पूरे मामले की फाइलें खोलिए, तो एलडीए की कागजी नौटंकी और अंदरूनी सांठ-गांठ का एक मुकम्मल नाटक देखने को मिलता है। दिसंबर 2025 में एलडीए के इंजीनियरों को अचानक दिव्य ज्ञान हुआ था कि श्री शंकर श्रीवास्तव और उनके सहयोगियों ने बिना स्वीकृत नक्शे के जमीन पर अवैध रूप से पिलर खड़े कर दिए हैं। आनन-फानन में साल के आखिरी दिन इमारत को सील कर पुलिस के हवाले कर दिया गया। लेकिन कहानी में असली ट्विस्ट आना अभी बाकी था। नया साल आते ही बिल्डर साहब एलडीए की चौखट पर शमन यानी कंपाउंडिंग की अर्जी लगाते हैं और जिम्मेदार बाबू व अफसरों के दिल मोम की तरह पिघल जाते हैं। नतीजतन, अप्रैल 2026 में रो-हाउस के नाम पर एक नक्शा पास कर दिया जाता है और मई के पहले हफ्ते में विहित प्राधिकारी एस.पी. सिंह एक महीने के लिए सील खोलने का शाही फरमान जारी कर देते हैं।
सीलमुक्ति के आदेश में जो शर्तें लिखी गईं, वे किसी हास्य कवि सम्मेलन की पटकथा जैसी हैं। आदेश में बड़े गंभीर लहजे में लिखा गया कि बिल्डर साहब इस सीलमुक्ति के दौरान अपने ईमानदार इंजीनियर को बुलाकर, स्वीकृत नक्शे के बाहर बने अवैध हिस्से को खुद अपने हाथों से तोड़ दें, वरना हम दोबारा सील कर देंगे। अब कोई इस मासूम प्राधिकरण के आला अधिकारियों से पूछे कि जो बिल्डर रात-दिन एक करके अवैध मंजिलें तान रहा था, क्या वह एलडीए के जूनियर इंजीनियरों के आदेश पर हथौड़ा लेकर अपनी ही इमारत ढहाने जाएगा?
हुआ भी वही, बिल्डर ने अवैध हिस्सा तो नहीं तोड़ा, बल्कि सील टूटने की ढील का पूरा फायदा उठाकर स्वीकृत नक्शे के ऊपर पांच मंजिल का पूरा कुतुब मीनार खड़ा कर दिया। आदेश में यह भी लिखा था कि अगर तय समय में अवैध निर्माण नहीं हटा, तो जून 2026 तक जोन-2 के जिम्मेदार अधिकारी मौके पर जाकर जीपीएस फोटो खींचेंगे और इसे दोबारा सील करेंगे। लेकिन मई 2026 का यह हफ्ता बीतने को है और मौके पर काम धड़ल्ले से चल रहा है। शायद एलडीए के फील्ड इंजीनियरों के कैमरों का लेंस बिल्डरों के रसूख और जेब की गर्मी के आगे धुंधला हो गया है या फिर सीलिंग के बाद डीलिंग का खेल इतना मुकम्मल हो चुका है कि प्रवर्तन टीम को अब वहां सब कुछ ‘वैध’ और हरा-भरा दिखाई दे रहा है।
जिस संकरी गली में आपातकाल के वक्त एक एम्बुलेंस या दमकल की गाड़ी नहीं घुस सकती, वहाँ पांच मंजिला अपार्टमेंट खड़ा कर दिया गया है। यहाँ पार्किंग के मानकों का यह हाल है कि गाड़ियां शायद हवा में लटकेंगी या पड़ोसियों के छतों पर पार्क होंगी। रही बात फायर NOC की, तो जब एलडीए के जूनियर इंजीनियर से लेकर ऊपर तक की मेहरबानी साथ हो, तो आग भी नियमों का पालन करते हुए खुद-ब-खुद बुझ जाएगी, इसके लिए फायर विभाग के कागजों की भला क्या जरूरत!
अब जनता एलडीए के उच्च अधिकारियों से यह पूछने को मजबूर है कि अगर नक्शा रो-हाउस का था, तो मौके पर पांच मंजिला महल कैसे खड़ा हो गया? क्या प्रवर्तन जोन-2 के इंजीनियरों और जोनल अफसरों के मोतियाबिंद का इलाज प्राधिकरण के फंड से कराया जाना चाहिए, जिन्हें अपनी नाक के नीचे इतनी बड़ी बिल्डिंग दिखाई नहीं दी? आदेश के मुताबिक मियाद खत्म होने के बाद भी अवैध निर्माण का ध्वस्तीकरण क्यों नहीं हुआ? क्या एलडीए की सील सिर्फ जनता को डराने और बैकडोर से समझौता करने का एक जरिया मात्र है? क्या मुख्यमंत्री के जीरो टॉलरेंस और बुलडोजर नीति का नियम केवल गरीब की झोपड़ी या छोटे दुकानदारों के लिए सुरक्षित है, जो सुजानपुरा के इस रसूखदार बिल्डर और एलडीए अफसरों के गठजोड़ के सामने आते ही एलडीए का बुलडोजर पंगु हो जाता है?
सुजानपुरा की यह पांच मंजिला इमारत इस बात का जीता-जागता स्मारक है कि अगर आपकी जेब में दम, रसूख में चमक और एलडीए के अफसरों का साथ हो, तो आप 12 फीट की गली में भी बुर्ज खलीफा बनाने की हिम्मत कर सकते हैं। देखना यह है कि इस गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार पर एलडीए के आला अफसर जागते हैं या फिर महीने की बंधी-बंधाई व्यवस्था के तहत इस अवैध ढांचे को लखनऊ की नई विरासत घोषित कर देते हैं।




