
- वाराणसी मंडल ब्यूरो
Varanasi. जानलेवा हमला और गैंगस्टर एक्ट के करीब दो दशक पुराने मामले में तीन आरोपितों को अदालत से बड़ी राहत मिली है। विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) सुशील कुमार खरवार की अदालत ने कोदई चौकी, दशाश्वमेध निवासी भोलू, नायाब और मुकेश कुमार सिन्हा को आरोप सिद्ध न होने पर संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। मामले में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव ‘गुड्डू’, आनंद तिवारी पंकज और नरेश यादव ने पैरवी की।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादिनी जहांआरा ने दशाश्वमेध थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि 8 जुलाई 2002 की रात करीब साढ़े नौ बजे वह अपने घर से करीब दस कदम की दूरी पर स्थित मैदान में अपनी नौ वर्षीय बच्ची के साथ बैठी थी। इसी दौरान पीछे से किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसे गोली मार दी। गोली लगते ही वह बेहोश होकर मौके पर गिर पड़ी। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू की।
विवेचना के दौरान भोलू, नायाब और मुकेश कुमार सिन्हा के नाम सामने आए। पुलिस की जांच में यह भी दावा किया गया कि तीनों का एक संगठित गिरोह है, जो अपने तथा गिरोह के सदस्यों के आर्थिक एवं भौतिक लाभ के लिए हत्या के प्रयास, लूट और छिनैती समेत विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहा है। इसके बाद पुलिस ने तीनों के खिलाफ जानलेवा हमला, गैंगस्टर एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने गवाहों के बयान और प्रस्तुत साक्ष्यों का अवलोकन किया। आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर अदालत ने तीनों आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।




