- वाराणसी मंडल ब्यूरो पंकज झा
वाराणसी। पूर्वांचल मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर और सोनभद्र पुलिस की लगातार जारी ताबड़तोड़ कार्रवाई निश्चित रूप से सराहनीय है। एक के बाद एक बड़ी खेप की बरामदगी और तस्करों पर कसता शिकंजा यह संदेश दे रहा है कि नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार तेज हो रहा है।
लेकिन कुंतलों में पकड़ी जा रही मादक पदार्थों की खेप के बीच एक बेहद गंभीर सवाल भी खड़ा होता है—आखिर इतनी बड़ी मात्रा में नशीला पदार्थ युवाओं तक पहुंचने के लिए किस रास्ते और किस नेटवर्क का सहारा लेता है? यदि इतनी बड़ी खेप का कुछ हिस्सा भी बाजार तक पहुंच जाए, तो वह कितने परिवारों और कितनी युवा जिंदगियों को प्रभावित कर सकता है, इसकी गंभीरता को समझना जरूरी है।
नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई केवल बरामदगी और गिरफ्तारी तक सीमित न रहे। मादक पदार्थों की खरीद, परिवहन, भंडारण और सप्लाई से जुड़े पूरे नेटवर्क की प्रत्येक कड़ी तक पहुंचना बेहद जरूरी है। इसके पीछे जुड़े लोगों, आर्थिक लेन-देन और आपूर्ति तंत्र की विधि-सम्मत जांच कर पूरे नेटवर्क को कानून के शिकंजे में लाना ही इस अभियान को वास्तविक मजबूती देगा।
वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर और सोनभद्र पुलिस की सक्रियता तथा लगातार की जा रही कार्रवाई प्रशंसा के योग्य है। अलग-अलग जिलों में चल रहे अभियानों के बीच बेहतर आपसी समन्वय से नशे के इस अवैध कारोबार पर और प्रभावी प्रहार किया जा सकता है।
क्योंकि सवाल सिर्फ आज पकड़ी गई एक खेप का नहीं है। सवाल उन युवाओं का भी है, जिन्हें नशे के जाल में फंसाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस रास्ते में नशे की खेप रोक रही है, लेकिन समाज के सामने यह चुनौती भी है कि इस कारोबार की जड़ कहां तक फैली है और उसे स्थायी रूप से कैसे काटा जाए।
अब जरूरत है कि कार्रवाई की धार सिर्फ सामने दिखने वाले तस्कर तक नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की प्रत्येक कड़ी तक पहुंचे। कानून के दायरे में रहते हुए ऐसी प्रभावी कार्रवाई हो कि नशे के अवैध कारोबार का तंत्र बार-बार खड़ा न हो सके।
नशे के सौदागरों पर वार, युवाओं के भविष्य की सुरक्षा—वाराणसी से सोनभद्र तक पुलिस की मुहिम को सलाम।
एक भारत, स्वस्थ भारत के लिए नशे के खिलाफ यह लड़ाई लगातार, समन्वित और निर्णायक रूप से जारी रहनी चाहिए।




