
“सच दिखाना अपराध नहीं”, पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता की मांग, आंदोलन की चेतावनी
- रिपोर्ट: अमित कुमार
Ayodhya: देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार और उत्पीड़न को लेकर अयोध्या के पत्रकारों में भारी आक्रोश व्याप्त है। पत्रकारों ने इस घटना को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला बताते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की। बुधवार को जिला पत्रकार स्थल अयोध्या के पत्रकारों ने एकजुट होकर राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा और देशभर में पत्रकारों के साथ हो रहे कथित दुर्व्यवहार, उत्पीड़न तथा उनकी आवाज दबाने की घटनाओं पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
पत्रकारों ने कहा कि पत्रकार का काम सत्ता की चापलूसी करना नहीं, बल्कि जनता के सवालों को उठाना, सच्चाई को सामने लाना और व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार व अनियमितताओं को उजागर करना है। यदि पत्रकार अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए जनता की आवाज बनते हैं, तो उनके साथ दुर्व्यवहार और उत्पीड़न किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
जंतर-मंतर की घटना पर पत्रकारों में गहरा आक्रोश
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में पत्रकारों के साथ जिस तरह के व्यवहार की बात सामने आई है, उसे लेकर अयोध्या के पत्रकारों ने गहरी नाराजगी जताई। पत्रकारों ने कहा कि इस तरह की घटनाएं न केवल पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करती हैं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद को भी कमजोर करती हैं।
पत्रकारों का कहना था कि जब पत्रकार किसी धरना-प्रदर्शन, आंदोलन या सार्वजनिक स्थल पर मौजूद घटनाओं की रिपोर्टिंग करते हैं, तो उनका उद्देश्य जनता तक वास्तविक स्थिति पहुंचाना होता है। अगर घटनास्थल पर जो कुछ हो रहा है, उसे दिखाना ही पत्रकार का अपराध मान लिया जाएगा, तो फिर सच सामने लाने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
पत्रकारों ने सवाल उठाया कि क्या भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और जनता से जुड़े मुद्दों को उजागर करना अपराध है? क्या पत्रकारों को केवल वही दिखाना चाहिए, जो सत्ता में बैठे लोग दिखाना चाहते हैं? उन्होंने स्पष्ट कहा कि पत्रकारिता का मूल धर्म सच को सामने लाना है और इस जिम्मेदारी से पत्रकार पीछे नहीं हटेंगे।
पत्रकारों की आवाज दबाने का प्रयास बर्दाश्त नहीं
ज्ञापन सौंपने पहुंचे पत्रकारों ने आरोप लगाया कि देश में पत्रकारों को अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन करने के दौरान कई तरह की चुनौतियों और दबावों का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली में पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटना ने एक बार फिर पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पत्रकारों ने कहा कि पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, न कि पत्रकारों को डराना या उनकी आवाज दबाना। यदि किसी पत्रकार से कोई कानूनी उल्लंघन होता है, तो उसके लिए कानून के तहत उचित प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। लेकिन पत्रकार होने के कारण किसी के साथ दुर्व्यवहार, अपमान या उत्पीड़न किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र और जनता के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। जब पत्रकारों को ही स्वतंत्र रूप से काम करने से रोका जाएगा, तो आम जनता की समस्याएं, पीड़ितों की आवाज और व्यवस्था की खामियां सामने कैसे आएंगी?
संविधान ने दिया है आवाज उठाने का अधिकार
अयोध्या के पत्रकारों ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है। लोकतंत्र में असहमति, सवाल और आलोचना के लिए भी स्थान होना चाहिए। पत्रकारों का काम सवाल पूछना है और सत्ता तथा प्रशासन को जनता के प्रति जवाबदेह बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता किसी सरकार या राजनीतिक दल के पक्ष अथवा विपक्ष में खड़े होने का नाम नहीं है, बल्कि जनता के हित में निष्पक्षता के साथ सच्चाई सामने रखने का माध्यम है। इसलिए पत्रकारों की स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए बेहद जरूरी है।
पत्रकारों ने राष्ट्रपति से मांग की कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर पत्रकारों के साथ हुई कथित घटना का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो तथा देशभर में पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्र रूप से काम करने के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो सड़क पर उतरेंगे पत्रकार
ज्ञापन के माध्यम से पत्रकारों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि पत्रकारों के उत्पीड़न की घटनाओं पर तत्काल रोक लगाई जाए और पत्रकारों के सम्मान तथा सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो अयोध्या के पत्रकार लोकतांत्रिक तरीके से सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
पत्रकारों ने एक स्वर में कहा कि पत्रकारों की कलम को दबाकर, कैमरों को रोककर और सवाल पूछने वालों को डराकर लोकतंत्र को मजबूत नहीं किया जा सकता। सच को सामने आने से रोकने के प्रयास अंततः जनता के अधिकारों को कमजोर करते हैं।
उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि पत्रकारों का संघर्ष किसी व्यक्ति या सरकार विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता, सम्मान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। पत्रकारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना और उनकी सुरक्षा की गारंटी देना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है।
अयोध्या के पत्रकारों ने स्पष्ट संदेश दिया कि पत्रकारिता की आवाज दबाने के किसी भी प्रयास का लोकतांत्रिक तरीके से पुरजोर विरोध किया जाएगा। सच दिखाना अपराध नहीं है और पत्रकारों के सम्मान व स्वतंत्रता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता।
नोट: ज्ञापन सौंपने वाले पत्रकारों के नाम उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, इसलिए समाचार में किसी व्यक्ति का नाम शामिल नहीं किया गया है।




