
लखनऊ। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘मिशन भरोसा’ अभियान के तहत हुई जांच में गंभीर तथ्य सामने आए हैं। जांच के दौरान पता चला कि बड़ी संख्या में स्कूल वैन और बस चालकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, करीब 250 स्कूल वैन चालकों पर मारपीट, चोरी, नशीले पदार्थों से जुड़े अपराध और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं।
अभियान के तहत स्कूल वाहनों से जुड़े चालकों और स्टाफ का पुलिस सत्यापन किया जा रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चों के परिवहन की जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मचारी सुरक्षित और विश्वसनीय हों। हालांकि, जांच के निष्कर्षों ने अभिभावकों और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
बिना पुलिस सत्यापन के चला रहे थे वाहन
जांच में यह भी सामने आया कि कई चालक बिना पुलिस सत्यापन के ही स्कूल वाहनों का संचालन कर रहे थे। कुछ मामलों में नियुक्ति से पहले उनके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच तक नहीं की गई। प्रशासन अब ऐसे चालकों की सूची तैयार कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
अधिकारियों ने कहा कि स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि किसी भी चालक की नियुक्ति से पहले उसका पुलिस सत्यापन कराया जाए। साथ ही उसके ड्राइविंग लाइसेंस, अनुभव और आचरण की भी पूरी जांच होनी चाहिए। नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
सुरक्षा मानकों की होगी नियमित समीक्षा
हाल के दिनों में स्कूल वाहनों से जुड़े कई लापरवाही और आपराधिक घटनाओं के सामने आने के बाद प्रशासन ने निगरानी और सख्त करने का निर्णय लिया है। मिशन भरोसा के तहत अब स्कूल वाहनों का नियमित निरीक्षण, चालकों का सत्यापन और सुरक्षा मानकों की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को स्कूल वाहनों के संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अभिभावकों ने उठाई सख्त कार्रवाई की मांग
इस खुलासे के बाद अभिभावकों ने सभी स्कूलों में ड्राइवरों और अन्य कर्मचारियों का अनिवार्य पुलिस सत्यापन कराने तथा सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि बच्चों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता न हो।
नोट: इस मामले में सामने आए आंकड़े प्रारंभिक जांच रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों के दावों पर आधारित हैं। अंतिम कार्रवाई विस्तृत जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।





