
उत्तर प्रदेश के Sonbhadra में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक इंटर-स्टेट साइबर क्राइम रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह सोशल मीडिया पर खुद को सेना और पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को ब्लैकमेल, एक्सटॉर्शन और ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार बनाता था।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस साइबर गिरोह की गतिविधियों से परेशान होकर एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली थी। जांच में सामने आया कि मृतक को लगातार ऑनलाइन धमकियां दी जा रही थीं और उससे पैसों की मांग की जा रही थी, जिससे वह मानसिक तनाव में था।
मामले का खुलासा तब हुआ जब शिकायतकर्ता अंकिता पाठक ने 29 अप्रैल को सोनभद्र पुलिस अधीक्षक Abhishek Verma से संपर्क किया। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनके पति राजेंद्र पाठक ने 7-8 अप्रैल की रात अपने नए घर में आत्महत्या कर ली थी। शुरुआत में आत्महत्या के कारण स्पष्ट नहीं हो सके थे, लेकिन बाद में परिवार ने मृतक के मोबाइल फोन की जांच की।
मोबाइल से मिले चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सबूतों से पता चला कि कुछ अज्ञात लोग उन्हें लगातार परेशान कर रहे थे और पैसों की मांग कर रहे थे। इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी जांच शुरू की। जांच में सर्विलांस डेटा, बैंक ट्रांजैक्शन एनालिसिस और सीसीटीवी फुटेज की मदद ली गई।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय था। इसी आधार पर पुलिस ने राजस्थान से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर खुद को आर्मी और पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को डराते थे और फिर उनसे पैसे वसूलते थे।
पुलिस के मुताबिक यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था और इसके नेटवर्क की कई राज्यों में जांच जारी है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि इस साइबर रैकेट से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश भी जारी है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
इस घटना ने एक बार फिर साइबर अपराध और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग के बढ़ते खतरे को उजागर किया है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑनलाइन गतिविधि की तुरंत सूचना दें और अनजान लोगों से सतर्क रहें।




