
- अलीगंज में अवैध निर्माण और अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर कार्रवाई, भवन स्वामी ने जताया विरोध
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में पिछले महीने हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद विवादों में आई चार मंजिला इमारत का शनिवार को ध्वस्तीकरण शुरू कर दिया गया। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने भारी पुलिस बल और बुलडोजर सहित अन्य मशीनों की मौजूदगी में कार्रवाई शुरू की। ध्वस्तीकरण के दौरान पूरे इलाके की घेराबंदी कर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और आसपास के मार्गों पर बैरिकेडिंग लगाकर यातायात रोक दिया गया।
एलडीए ने बताई कार्रवाई की वजह
एलडीए अधिकारियों के अनुसार, संबंधित भवन में अवैध निर्माण और अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के मामले सामने आने के बाद ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था। प्राधिकरण का कहना है कि भवन स्वामी को स्वयं निर्माण हटाने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर एलडीए को ध्वस्तीकरण शुरू करना पड़ा।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पूरी कार्रवाई प्राधिकरण द्वारा कराई जाती है तो ध्वस्तीकरण का खर्च भी भवन स्वामी से वसूला जाएगा।
भवन स्वामी ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
ध्वस्तीकरण के दौरान भवन स्वामी वीरेंद्र शुक्ला की ओर से उनके अधिवक्ता राजेंद्र शुक्ला मौके पर पहुंचे और कार्रवाई का विरोध किया। उन्होंने कहा कि भवन स्वामी को 25 जुलाई तक का समय दिया गया था, ऐसे में उसी दिन सुबह ध्वस्तीकरण शुरू करना उचित नहीं है।
अधिवक्ता का आरोप है कि ध्वस्तीकरण का अलग आदेश उपलब्ध नहीं कराया गया और केवल नोटिस के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले को न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। साथ ही आदेश की प्रमाणित प्रति समय पर उपलब्ध न होने का मुद्दा भी उठाया गया।
22 जून को हुआ था भीषण अग्निकांड
गौरतलब है कि 22 जून को अलीगंज स्थित इसी भवन में भीषण आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के समय भवन की दूसरी मंजिल पर संचालित लाइब्रेरी और प्रशिक्षण केंद्र में बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे। कई छात्रों ने पाइप और बिजली के तारों के सहारे नीचे उतरकर अपनी जान बचाई, जबकि एक युवक ऊंचाई से कूदने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गया था।
सीएम योगी ने लिया था संज्ञान
घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। वहीं पुलिस ने भवन निर्माण और अग्नि सुरक्षा मानकों में कथित लापरवाही के आरोप में चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। प्रारंभिक जांच में भवन में अग्नि सुरक्षा और निर्माण से जुड़ी कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं।




