
- गन्ना भुगतान के करोड़ों रुपये बकाया, नीलामी विवाद के बीच मिलों के भविष्य पर बढ़ी चिंता
बरेली। बरेली जिले की बहेड़ी स्थित केसर चीनी मिल और नवाबगंज की ओसवाल चीनी मिल आर्थिक संकट से जूझ रही हैं। दोनों मिलों के बंद होने और नीलामी की आशंका के बीच करीब 80 हजार गन्ना किसानों और 1,650 कर्मचारियों की आजीविका पर संकट गहरा गया है। किसानों का कहना है कि यदि मिलें बंद हो गईं तो क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ेगा।
करोड़ों रुपये का गन्ना भुगतान अब भी बकाया
जानकारी के अनुसार, केसर चीनी मिल पर किसानों का करीब 146 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य बकाया है, जबकि ओसवाल चीनी मिल पर लगभग 55 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित बताया जा रहा है। भुगतान में देरी के चलते किसानों और मिल प्रबंधन के बीच लंबे समय से विवाद बना हुआ है।
केसर चीनी मिल की जमीन की नीलामी पर विवाद
वर्ष 1933 में स्थापित बहेड़ी की केसर चीनी मिल कभी क्षेत्र की प्रमुख औद्योगिक इकाई मानी जाती थी। इसकी पेराई क्षमता समय के साथ 800 टन प्रतिदिन से बढ़कर 7,200 टन प्रतिदिन तक पहुंच गई थी। यहां चीनी उत्पादन के साथ डिस्टिलरी, इथेनॉल और खोई आधारित बिजली उत्पादन भी होता था।
प्रशासन ने बकाया वसूली की कार्रवाई के तहत मिल की करीब 11.447 हेक्टेयर भूमि की 28.05 करोड़ रुपये में नीलामी की प्रक्रिया शुरू की। हालांकि किसानों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि हाईवे किनारे स्थित इस जमीन का बाजार मूल्य कहीं अधिक है और इसे कम कीमत पर बेचा जा रहा है। इसके बाद गन्ना समिति और किसानों ने नीलामी रद्द कर नई प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।
ओसवाल चीनी मिल पर भी मंडरा रहा संकट
नवाबगंज की ओसवाल चीनी मिल, जिसकी स्थापना 1996 में हुई थी, क्षेत्र के लगभग 40 हजार किसान परिवारों से जुड़ी रही है। मिल में 50 स्थायी और करीब 300 मौसमी कर्मचारी कार्यरत थे।
आर्थिक संकट के चलते इस मिल पर भी किसानों का बड़ा भुगतान बकाया है। पिछले पेराई सत्र में शासन द्वारा गन्ना आवंटन नहीं किए जाने से मिल के संचालन पर और संकट गहरा गया है।
किसानों ने मिल बचाने की उठाई मांग
किसानों का कहना है कि सरकार को मिलों को बंद करने के बजाय उनका पुनरुद्धार करना चाहिए और किसानों के बकाया गन्ना भुगतान का समाधान निकालना चाहिए। उनका कहना है कि मिलों के बंद होने से हजारों परिवारों की आय प्रभावित होगी और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।
गन्ना समिति के निदेशक चौधरी ओमवीर सिंह ने कहा कि किसान मिलों को बंद नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि यदि किसान चाहते तो गन्ने की आपूर्ति पहले ही रोक सकते थे, लेकिन उनकी मांग है कि सरकार हस्तक्षेप कर मिलों को बचाए और किसानों का बकाया भुगतान सुनिश्चित करे।
प्रशासन ने समाधान का दिया भरोसा
प्रशासन का कहना है कि दोनों चीनी मिलों को बंद होने से बचाने और किसानों के बकाया भुगतान का समाधान निकालने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित पक्षों के साथ बातचीत जारी है, हालांकि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका है।




