
- वाराणसी मंडल ब्यूरो
वाराणसी। धर्म और आस्था की नगरी काशी में नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़, बाजारों में बढ़ती चहल-पहल और सड़कों पर वाहनों की आवाजाही के बीच थाना चेतगंज क्षेत्र में कथित अवैध पार्किंग और वसूली का मामला गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। होटल प्रदीप के पास और महाराजा फास्ट फूड के नजदीक कथित तौर पर अस्थायी स्टैंड बनाकर वाहनों को खड़ा कराया जा रहा है। आरोप है कि इस व्यवस्था की आड़ में वाहन चालकों से पैसे वसूले जा रहे हैं। यदि ये आरोप सही हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर किसकी अनुमति से यह कथित स्टैंड संचालित हो रहा है और किसके संरक्षण में अवैध पार्किंग की वसूली चल रही है? क्या त्योहारों पर उमड़ने वाली भीड़ कुछ लोगों के लिए कमाई का जरिया बन गई है, या फिर इस पूरे मामले की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं है?
त्योहार की भीड़ के बीच पार्किंग के नाम पर वसूली का आरोप, आखिर किसका है संरक्षण?
नवरात्र के दौरान वाराणसी के विभिन्न इलाकों में श्रद्धालुओं, ग्राहकों और आम नागरिकों की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में सड़क किनारे वाहनों को खड़ा कराने के लिए अस्थायी स्टैंड बनाए जाने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है। थाना चेतगंज क्षेत्र में होटल प्रदीप और महाराजा फास्ट फूड के आसपास कथित पार्किंग व्यवस्था को लेकर भी इसी तरह के सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के मुताबिक, वाहनों को खड़ा कराने के नाम पर लोगों से रकम वसूली जा रही है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि संबंधित स्थान पर पार्किंग संचालन की कोई वैध अनुमति है या नहीं। यदि अनुमति नहीं है, तो फिर किस आधार पर वाहनों को खड़ा कराया जा रहा है और पैसे वसूलने का अधिकार किसने दिया है?
कुछ दिनों की भीड़, फिर कमाई का खेल?
त्योहारों के दौरान भीड़ बढ़ने के साथ ही यातायात और पार्किंग व्यवस्था को दुरुस्त रखना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसी परिस्थिति में यदि कोई व्यक्ति या समूह बिना वैध अनुमति के सड़क किनारे स्टैंड संचालित कर वसूली करता है, तो यह आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। सवाल यह भी है कि क्या नवरात्र की भीड़ का फायदा उठाकर कुछ लोग अस्थायी पार्किंग व्यवस्था के जरिए कमाई कर रहे हैं? क्या वाहनों को खड़ा कराने के लिए निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है? और यदि किसी प्रकार की वसूली हो रही है, तो उसकी दरें किसने तय की हैं? इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
सड़क पर कथित अवैध स्टैंड, यातायात व्यवस्था पर भी सवाल
होटल प्रदीप और महाराजा फास्ट फूड के आसपास कथित तौर पर संचालित स्टैंड की स्थिति की जांच इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि सड़क किनारे अनियंत्रित पार्किंग से आवागमन बाधित होने, जाम लगने और राहगीरों को परेशानी होने की आशंका रहती है। त्योहारों के दौरान जब बड़ी संख्या में लोग बाजारों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर पहुंचते हैं, तब यातायात व्यवस्था में किसी भी तरह की अव्यवस्था मुश्किलें बढ़ा सकती है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर वाहनों को खड़ा कराने की व्यवस्था नियमानुसार संचालित हो रही है या नहीं। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
जिम्मेदारों की नजर से कैसे बच रहा कथित वसूली का मामला?
इस पूरे प्रकरण में पुलिस, यातायात विभाग और नगर निगम की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर संबंधित क्षेत्र में नियमित निगरानी की व्यवस्था कैसी है? क्या अधिकारियों को कथित अवैध पार्किंग और वसूली की जानकारी है? यदि शिकायतें मिल रही हैं, तो अब तक उनकी जांच क्यों नहीं हुई? और यदि मामला अधिकारियों की जानकारी में नहीं है, तो क्षेत्र में निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। इसलिए जरूरी है कि संबंधित विभाग तथ्यों के आधार पर मामले की जांच करें और पार्किंग की वैधता, वसूली के आधार तथा इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट करें। बिना जांच किसी व्यक्ति या विभाग को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर कथित अनधिकृत वसूली की शिकायतों को नजरअंदाज करना भी जनहित में नहीं है।
अब कार्रवाई का इंतजार, क्या सामने आएगा कथित वसूली के खेल का सच?
नवरात्र जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को सुगम आवागमन, सुरक्षित यातायात और अनधिकृत वसूली से राहत मिलनी चाहिए। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को होटल प्रदीप और महाराजा फास्ट फूड के आसपास की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कराना चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित स्थान पर पार्किंग की अनुमति है या नहीं, वाहनों से पैसे लिए जा रहे हैं तो किस आधार पर, और कथित स्टैंड के संचालन में किन लोगों की भूमिका है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पार्किंग वैध है, तो उसके अनुमति संबंधी विवरण और निर्धारित शुल्क स्पष्ट क्यों नहीं हैं? और यदि पार्किंग अवैध है, तो आखिर किसके संरक्षण में वसूली का यह कथित खेल चल रहा है?
अब देखना यह है कि संबंधित अधिकारी मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई करते हैं या फिर नवरात्र की भीड़ समाप्त होने के बाद यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाता है। फिलहाल, स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों की सच्चाई सामने लाने के लिए प्रशासनिक जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।





