
- रिपोर्ट: पंकज झा
वाराणसी। राजातालाब आराजी लाइन विकासखंड क्षेत्र के शाहंशाहपुर स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान में रविवार को “खेत बचाओ अभियान, संतुलित उर्वरक उपयोग एवं प्राकृतिक खेती” विषय पर एक महत्वपूर्ण बृहद किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में एफपीओ, पीएमओ प्रतिनिधियों, कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विभाग के अधिकारियों तथा बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। गोष्ठी के मुख्य अतिथि एस. राजलिंगम रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार के प्रतिनिधि एवं बंसी गीर गोशाला के संस्थापक गोपाल भाई सुतरीया ने कहा कि प्राकृतिक खेती को सफल बनाने के लिए गाय को उसके केंद्र में रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गो-आधारित कृषि, आयुर्वेद और शिक्षा ही देश की कृषि व्यवस्था को दीर्घकालिक रूप से सुरक्षित और समृद्ध बना सकते हैं। उन्होंने किसानों को खेतों की मेड़ पर नीम और नैपियर घास लगाने, जैविक संसाधनों का उपयोग बढ़ाने तथा चरणबद्ध तरीके से प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि इससे उत्पादन क्षमता में कई गुना वृद्धि संभव है।
गोष्ठी में संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने “संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान” की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि 20 अप्रैल से 31 मई तक चले अभियान के दौरान 21 वैज्ञानिक टीमों ने 23 गांवों में पहुंचकर 2,673 किसानों को प्रशिक्षित किया। इस अवधि में 197 प्रदर्शन आयोजित किए गए तथा 387 हेक्टेयर क्षेत्र को अभियान के अंतर्गत कवर किया गया। अभियान के सकारात्मक परिणामस्वरूप 7.74 टन नाइट्रोजन, 7.74 टन फॉस्फोरस और 3.87 टन पोटाश की बचत दर्ज की गई।
उन्होंने आगे बताया कि 15 जून तक संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत पांच जनपदों में 36 खेत भ्रमण और 87 प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान 2,395 किसानों तक सीधा संपर्क स्थापित किया गया तथा किसानों के बीच 415 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा और 430 लीटर सूक्ष्मजीवी कंसोर्टिया वितरित किया गया। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप 430 हेक्टेयर क्षेत्र में 8.60 टन नाइट्रोजन, 8.60 टन फॉस्फोरस तथा 4.30 टन पोटाश की बचत संभव हुई, जिससे खेती की लागत कम करने और मृदा स्वास्थ्य सुधारने में महत्वपूर्ण मदद मिली।
मुख्य अतिथि एस. राजलिंगम ने अपने संबोधन में कहा कि “खेत बचाओ अभियान” केवल एक कृषि कार्यक्रम नहीं, बल्कि मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा राष्ट्रीय जन-आंदोलन है। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह ने प्राकृतिक खेती के साथ कृषि आधारित उद्यमिता की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में चंद्रशेखर सिंह, डॉ. सीपी श्रीवास्तव, अमित जायसवाल, संगम मौर्या, सुभाष कुमार सहित कृषि विभाग के अनेक अधिकारी, 20 एफपीओ प्रतिनिधि तथा 650 से अधिक किसान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीरज सिंह ने किया। गोष्ठी के अंत में उपस्थित सभी किसानों, वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने “स्वस्थ मिट्टी – स्वस्थ फसल – स्वस्थ किसान – समृद्ध भारत” के संकल्प को दोहराते हुए प्राकृतिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग और मृदा संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का संकल्प लिया। कृषि विशेषज्ञों ने विश्वास व्यक्त किया कि वैज्ञानिक तकनीकों और प्राकृतिक संसाधनों के समन्वित उपयोग से खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है।





