
- वाराणसी मंडल ब्यूरो
वाराणसी। वाराणसी के शिवपुर थाना क्षेत्र स्थित स्टेडियम में आयोजित दुर्गा पूजा मेले में कथित तौर पर जर्जर झूलों का संचालन किए जाने का मामला सामने आया है। मेले में मनोरंजन के लिए लगाए गए झूलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि झूलों की स्थिति वास्तव में खराब है और बिना समुचित सुरक्षा जांच के उनका संचालन किया जा रहा है, तो यह मेले में आने वाले लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जिम्मेदार विभाग इस मामले को लेकर कितने गंभीर हैं और किसी संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं?
दुर्गा पूजा के अवसर पर आयोजित मेलों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं, बच्चे और परिवार मनोरंजन के लिए पहुंचते हैं। खासकर बच्चों में झूलों को लेकर काफी उत्साह रहता है। ऐसे में झूलों की मजबूती, उनकी तकनीकी स्थिति, सुरक्षा उपकरणों और संचालन व्यवस्था की जांच बेहद जरूरी हो जाती है। यदि किसी झूले का ढांचा कमजोर है, उसके पुर्जे खराब हैं या सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है, तो एक छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।
जर्जर झूलों के संचालन के आरोपों से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
शिवपुर स्टेडियम के दुर्गा पूजा मेले में जर्जर झूलों के संचालन को लेकर उठ रहे सवालों ने सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मेले में लगाए गए झूलों की तकनीकी जांच किस विभाग ने की है? क्या उनके संचालन से पहले सुरक्षा मानकों का सत्यापन किया गया? क्या संबंधित संचालकों के पास आवश्यक अनुमति और सुरक्षा संबंधी प्रमाणपत्र उपलब्ध हैं? यदि जांच में झूले असुरक्षित पाए जाते हैं, तो उनके संचालन पर तत्काल रोक लगाना आवश्यक है।
प्रशासन और पुलिस की निगरानी पर उठे सवाल
मेले में भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों से अपेक्षा की जा रही है कि वे मामले का तत्काल संज्ञान लें और मौके पर पहुंचकर झूलों की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कराएं। केवल सामान्य निगरानी पर्याप्त नहीं है, बल्कि झूलों की तकनीकी सुरक्षा, उनकी क्षमता और संचालन संबंधी नियमों की भी जांच होनी चाहिए।
हादसे से पहले कार्रवाई की मांग
स्थानीय स्तर पर उठ रहे सुरक्षा संबंधी सवालों के बीच मांग की जा रही है कि वाराणसी के जिला प्रशासन और पुलिस कमिश्नर मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल आवश्यक कार्रवाई करें। सभी झूलों की सक्षम तकनीकी विशेषज्ञों से जांच कराई जाए और जो झूले जर्जर अथवा असुरक्षित पाए जाएं, उनका संचालन जांच पूरी होने और सुरक्षा सुनिश्चित होने तक बंद कराया जाए। साथ ही, नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
आखिर किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि मेले में झूलों की सुरक्षा को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं, तो समय रहते उनकी जांच क्यों न कराई जाए? क्या प्रशासन किसी अप्रिय घटना के बाद ही सक्रिय होगा? हालांकि, झूलों के जर्जर होने और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी, लेकिन आम नागरिकों की सुरक्षा के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
दुर्गा पूजा का मेला आस्था, उत्साह और मनोरंजन का अवसर है, न कि लोगों की जान जोखिम में डालने का। इसलिए प्रशासन को चाहिए कि वह बिना देर किए मामले की जांच कराए, सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करे और किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी समय रहते कार्रवाई करते हैं या सुरक्षा से जुड़ा यह गंभीर सवाल केवल शिकायतों और चर्चाओं तक ही सीमित रह जाता है।




