
- वाराणसी मंडल ब्यूरो
वाराणसी। चितईपुर थाना क्षेत्र स्थित महामनापुरी पार्क में दुर्गा पूजा पंडाल के बाहर मारपीट की घटना सामने आने से इलाके में हड़कंप मच गया। घटना के दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पंडाल में डांडिया खेल रही महिलाओं और वहां मौजूद अन्य लोगों के बीच दहशत फैल गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को हिरासत में लिया है।
जानकारी के अनुसार, महामनापुरी पार्क में दुर्गा पूजा के अवसर पर पंडाल बनाया गया है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पूजा-अर्चना के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों और डांडिया का आयोजन भी किया जा रहा है। इसी दौरान पंडाल के बाहर कुछ लोगों के बीच मारपीट होने की घटना सामने आई। अचानक हुए हंगामे से वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
मारपीट से महिलाओं में फैली दहशत
स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र के एक कथित हिस्ट्रीशीटर के उत्पात के कारण विवाद बढ़ा और मारपीट की स्थिति पैदा हुई। घटना के समय पंडाल में महिलाएं डांडिया खेल रही थीं। पंडाल के बाहर हुए हंगामे और मारपीट से महिलाओं सहित अन्य श्रद्धालुओं में भय का माहौल बन गया। धार्मिक आयोजन में शामिल होने पहुंचे लोगों को अचानक उपजे इस घटनाक्रम से परेशानी का सामना करना पड़ा।
पुलिस ने चार आरोपियों को हिरासत में लिया
घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को हिरासत में लिया है। अब पुलिस की जांच में मारपीट के पीछे की वजह, विवाद में शामिल लोगों की भूमिका और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हालांकि, घटना के कारणों और आरोपियों की भूमिका को लेकर पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
दुर्गा पूजा जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और अन्य श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे में पंडालों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोकना पुलिस-प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
महामनापुरी पार्क में दुर्गा पंडाल के बाहर हुई मारपीट की घटना ने धार्मिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और श्रद्धालु भयमुक्त वातावरण में धार्मिक आयोजनों में शामिल हो सकें।




