
- जन-जन की आवाज — पंकज झा की कलम से ✍️
वाराणसी/चिरईगांव। एक ओर शिक्षा का मंदिर स्कूल और दूसरी ओर सुरक्षा का प्रतीक पुलिस चौकी, लेकिन इनके बीच का मार्ग वर्षों से अंधेरे में डूबा हुआ है। यह स्थिति न केवल बुनियादी सुविधाओं की कमी को दर्शाती है, बल्कि जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उदासीनता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। जिस रास्ते से प्रतिदिन छात्र-छात्राएं, महिलाएं, बुजुर्ग और सैकड़ों ग्रामीण गुजरते हैं, वहां आज तक पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं हो सकी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभागों, ग्राम पंचायत और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। शाम ढलते ही पूरा क्षेत्र अंधेरे की चपेट में आ जाता है, जिससे लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ जाती है। विशेष रूप से छात्राओं और महिलाओं को इस रास्ते से गुजरने में कठिनाइयों और भय का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि अंधेरे का लाभ उठाकर असामाजिक तत्व सक्रिय हो जाते हैं। सुनसान और अंधकारमय मार्ग किसी भी अप्रिय घटना को आमंत्रण दे सकता है। ऐसे में लोगों का सवाल है कि जब क्षेत्र में पुलिस चौकी मौजूद है, तब भी इस महत्वपूर्ण मार्ग पर प्रकाश व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकी है।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि विकास और जनसुविधाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। स्कूल और पुलिस चौकी जैसे महत्वपूर्ण स्थानों के बीच का रास्ता यदि आज भी अंधेरे में है, तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सबसे बड़ा सवाल चिरईगांव ब्लॉक प्रमुख और ग्राम प्रधान की भूमिका को लेकर उठ रहा है। ग्रामीण पूछ रहे हैं कि आखिर इस गंभीर समस्या पर जिम्मेदार जनप्रतिनिधि मौन क्यों हैं? क्या जनता की सुरक्षा और सुविधा उनकी प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है? क्या किसी बड़ी दुर्घटना या अप्रिय घटना का इंतजार किया जा रहा है?
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मार्ग पर तत्काल स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएं और नियमित रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि यह केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि सुरक्षा और जनहित से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
अब पूरे क्षेत्र की निगाहें प्रशासन, ग्राम प्रधान और ब्लॉक प्रमुख पर टिकी हैं। जनता यह जानना चाहती है कि इस अंधेरे को दूर करने के लिए कब ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।




