
New Delhi: अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण में आय के आधार पर ‘क्रीमी लेयर’ लागू करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिकाओं पर केंद्र सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। केंद्र ने शीर्ष अदालत में दाखिल हलफनामे में कहा है कि SC और ST आरक्षण में क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू नहीं होता। सरकार ने अदालत से इस संबंध में दाखिल याचिकाओं को खारिज करने का अनुरोध किया है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से दाखिल हलफनामे में केंद्र ने कहा कि आरक्षण से जुड़ी नीतियां बनाना कार्यपालिका का क्षेत्र है। सरकार के मुताबिक, अदालत द्वारा किसी नीति में बदलाव का निर्देश देना न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र से बाहर होगा।
SC/ST आरक्षण का आधार आर्थिक स्थिति नहीं
केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि SC, ST और OBC वर्गों के लिए आरक्षण के आधार अलग-अलग हैं। अनुसूचित जातियों को ऐतिहासिक रूप से छुआछूत और सामाजिक भेदभाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है, जबकि अनुसूचित जनजातियों का पिछड़ापन उनकी विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों और भौगोलिक अलगाव से जुड़ा रहा है।
सरकार का तर्क है कि SC और ST की पहचान केवल आर्थिक आधार पर नहीं हुई है, बल्कि इनके ऐतिहासिक और सामाजिक पिछड़ेपन को ध्यान में रखते हुए इन्हें संवैधानिक संरक्षण दिया गया है।
OBC के लिए लागू हुआ था क्रीमी लेयर का सिद्धांत
केंद्र ने कहा कि क्रीमी लेयर की अवधारणा मुख्य रूप से OBC वर्ग के संदर्भ में विकसित हुई। वर्ष 1992 के ऐतिहासिक इंदिरा साहनी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने OBC वर्ग के अपेक्षाकृत संपन्न लोगों को आरक्षण के लाभ से बाहर रखने की व्यवस्था की थी।
सरकार का कहना है कि इस सिद्धांत को SC और ST पर लागू करने के लिए अलग सामाजिक और संवैधानिक आधार की आवश्यकता होगी।
नीतिगत बदलाव से पहले व्यापक अध्ययन जरूरी
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि आरक्षण नीति में किसी भी तरह का बदलाव व्यापक सामाजिक-आर्थिक अध्ययन और गहन समीक्षा के बाद ही किया जाना चाहिए। सरकार के अनुसार, पहले के किसी भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले में स्पष्ट रूप से यह निर्देश नहीं दिया गया है कि क्रीमी लेयर का सिद्धांत SC और ST आरक्षण पर अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।
केंद्र ने यह भी कहा कि क्रीमी लेयर से जुड़ी पूर्व टिप्पणियां मुख्य रूप से OBC और SEBC वर्गों के संदर्भ में थीं।
2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उठा मुद्दा
SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के 1 अगस्त 2024 के फैसले के बाद और प्रमुखता से सामने आया। सात जजों की संविधान पीठ ने 6:1 के बहुमत से SC/ST आरक्षण में उप-वर्गीकरण (Sub-classification) को मंजूरी दी थी।
फैसले के दौरान चार न्यायाधीशों ने अपनी अलग-अलग राय में SC/ST वर्गों में अपेक्षाकृत संपन्न लोगों की पहचान कर उन्हें आरक्षण के लाभ से बाहर करने की आवश्यकता की बात कही थी।
पूर्व न्यायमूर्ति बी.आर. गवई ने भी अपनी राय में वास्तविक समानता हासिल करने के लिए इस दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया था।
केंद्र ने याचिकाओं का किया विरोध
वकील अश्विनी उपाध्याय, रामाशंकर प्रजापति समेत अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग की गई है। केंद्र सरकार ने इन मांगों का विरोध करते हुए कहा है कि मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था में SC/ST आरक्षण के लिए क्रीमी लेयर का प्रावधान लागू नहीं है।
अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई और उसके रुख पर नजर रहेगी। केंद्र के हलफनामे के बाद SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर को लेकर चल रही कानूनी और नीतिगत बहस एक बार फिर तेज हो गई है।




