
-अपर जिला जज (प्रथम) संध्या श्रीवास्तव की अदालत ने 50-50 हजार रुपये की दो जमानतों पर रिहाई का दिया आदेश, वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने रखा बचाव पक्ष
- वाराणसी मंडल ब्यूरो
वाराणसी। संस्था में कार्यरत एक मैनेजर को बंधक बनाकर मारपीट करने, लूटपाट करने और उसके परिजनों से लाखों रुपये की फिरौती मांगने के गंभीर मामले में दो आरोपितों को अदालत से बड़ी राहत मिली है। अपर जिला जज (प्रथम) संध्या श्रीवास्तव की अदालत ने सुसुवाही, चितईपुर निवासी रविशंकर कुमार और सुधीर कुमार यादव की जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए उन्हें 50-50 हजार रुपये की दो जमानतें एवं बंधपत्र दाखिल करने पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने पैरवी की।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी राजकुमार सिंह ने भेलूपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया था कि उनका पुत्र सम्राट सिंह पिछले करीब सात महीने से दुर्गाकुंड स्थित निलांचल जगन्नाथ सेवा एलपीटी में मैनेजर के पद पर कार्यरत था। छह सितंबर 2026 को सुबह करीब 9:30 बजे सम्राट के मोबाइल से फोन आया। फोन पर वह काफी घबराया हुआ था और अपने पिता से जान बचाने की गुहार लगाते हुए पांच लाख 50 हजार रुपये लेकर तत्काल पहुंचने को कह रहा था।
इसके बाद जब वादी की पत्नी ने फोन किया तो कथित तौर पर संस्था के मालिक धवल पटेल ने फोन उठाया और सम्राट पर काम के दौरान पैसों की हेराफेरी करने का आरोप लगाते हुए रकम भेजने की मांग की। आरोप है कि पैसे नहीं मिलने तक सम्राट को नहीं छोड़ने की बात कहकर फोन काट दिया गया।
घटना से घबराए राजकुमार सिंह और उनकी पत्नी अपने मकान की रजिस्ट्री के मूल दस्तावेज लेकर वाराणसी पहुंचे। आरोप है कि होटल हरे कृष्णा में उनके पुत्र को बंधक बनाकर रखा गया था। काफी प्रयास के बाद जब दोपहर करीब 12 बजे मुलाकात हुई तो सम्राट के सिर से खून बह रहा था और शरीर के विभिन्न हिस्सों पर चोट के निशान थे।
परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने सम्राट को अपने साथ ले जाने का प्रयास किया तो वहां मौजूद लोगों ने उन्हें रोक दिया और मारपीट की। इतना ही नहीं, उनके मोबाइल फोन भी जमा करा लिए गए और रिश्तेदारों से पैसे मंगाने का दबाव बनाया गया।
प्राथमिकी में आगे आरोप लगाया गया कि सात सितंबर की रात सम्राट की मां के गहने, चेन, अंगूठी, झुमके और पायल छीन लिए गए। झुमके को कथित तौर पर एक लाख रुपये में बेच दिया गया। इसके बाद आरोपित राजकुमार सिंह को चार पहिया वाहन से लखनऊ स्थित उनके मकान ले गए, जहां दबाव बनाकर उनसे एक-एक लाख रुपये के चार चेक और 40 हजार रुपये का एक अन्य चेक ले लिया गया।
आरोप के मुताबिक, अगले दिन आठ सितंबर को वादी के लखनऊ स्थित मकान और प्रतापगढ़ के पैतृक गांव की जमीन का वीडियो भी बनाया गया। इसी दौरान सम्राट से कथित तौर पर मनगढ़ंत स्टांप पर हस्ताक्षर कराए गए। साथ ही मकान की मूल रजिस्ट्री और सम्राट का मोबाइल फोन सिम सहित अपने पास रख लिया गया।
मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अब अदालत ने दोनों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।




