
Mamata Banerjee ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत और तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आकर भाजपा विरोधी दलों को एकजुट होने का आह्वान किया है। शनिवार को राज्य में नई सरकार के गठन के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा को रोकने के लिए समान विचारधारा वाली सभी राजनीतिक ताकतों को एक मंच पर आना होगा।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि राज्य में चुनाव के बाद हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं और यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने सभी भाजपा विरोधी दलों, छात्र-युवा संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं से अपील करते हुए कहा कि भाजपा के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा तैयार किया जाना चाहिए।
ममता बनर्जी ने यह भी साफ किया कि भाजपा के खिलाफ बनने वाले इस संभावित मोर्चे में उनके पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी Communist Party of India (Marxist) और वाम मोर्चा का भी स्वागत है। उन्होंने कहा, “वामपंथी, धुर-वामपंथी और अन्य राष्ट्रीय दल—सभी का स्वागत है। आइए हम सब मिलकर भाजपा के खिलाफ एकजुट हों। कोई भी मुझसे संपर्क कर सकता है। अब मैं हर दिन शाम 4 बजे से 6 बजे तक अपने कार्यालय में उपलब्ध रहूंगी।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में भाजपा को अपना “पहला दुश्मन” बताते हुए कहा कि अब विपक्षी दलों के बीच मतभेद भुलाकर एकजुट संघर्ष की जरूरत है।
हालांकि, ममता बनर्जी के इस प्रस्ताव पर सीधे प्रतिक्रिया देने से बचते हुए Mohammad Salim ने गुरुदेव Rabindranath Tagore की प्रसिद्ध पंक्तियां उद्धृत कीं— “जीबोनो जोखोन शुकाये जाई, करुणा धाराई एशो” यानी “जब जीवन सूखने लगे, तब करुणा की धारा बनकर आओ।”
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की बड़ी हार और खुद ममता बनर्जी का भवानीपुर सीट से नए मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari के हाथों चुनाव हारना, राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसी के बाद ममता बनर्जी अब भाजपा विरोधी दलों को साथ लाने की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही हैं।





