
- वाराणसी मंडल ब्यूरो
वाराणसी। शहर के छावनी क्षेत्र में तेंदुए जैसे वन्यजीव की मौजूदगी की आशंका से लोगों में चिंता बढ़ गई है। वन्यजीव को अलग-अलग स्थानों पर देखे जाने की चर्चाओं के बीच वन विभाग ने तलाश अभियान तेज कर दिया है। बंगला नंबर 61 में पिंजरा लगाया गया है, जबकि संभावित ठिकानों की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरे की मदद ली जा रही है। इसके बावजूद देर शाम तक वन विभाग को कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका। फिलहाल क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एहतियात के तौर पर संभावित स्थानों पर निगरानी की जा रही है।
बंगला नंबर 61 में पिंजरा, ड्रोन से खंगाले जा रहे संभावित ठिकाने
छावनी क्षेत्र में वन्यजीव दिखाई देने की सूचना सामने आने के बाद वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई। वन क्षेत्राधिकारी संजय कुमार के मुताबिक, बंगला नंबर 61 में पिंजरा लगाया गया है और आसपास के संभावित ठिकानों की तलाश की जा रही है। इलाके में ड्रोन कैमरे से भी निगरानी की गई, लेकिन अभी तक वन्यजीव की मौजूदगी का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला है।
स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों ने वरुणा पुल के आसपास, जबकि कुछ ने कैंट के दूसरे हिस्सों में तेंदुए जैसे जानवर को देखने की बात कही है। इन सूचनाओं के बाद लोगों में भय और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वन विभाग अलग-अलग स्थानों से मिल रही जानकारियों की जांच कर रहा है, ताकि वन्यजीव की वास्तविक मौजूदगी और उसके संभावित ठिकाने का पता लगाया जा सके।
सेंट मेरीज कॉन्वेंट स्कूल से लेकर छावनी परिषद के विद्यालय तक सतर्कता
वन्यजीव की आशंका का असर शैक्षणिक गतिविधियों पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। सेंट मेरीज कॉन्वेंट स्कूल परिसर में वन्यजीव दिखाई देने की सूचना के बाद वन विभाग और छावनी परिषद की टीमों ने आसपास के क्षेत्रों में तलाश की थी। इसके बाद छावनी परिषद के विद्यालय को भी बंद किए जाने की जानकारी सामने आई है।
स्कूलों को लेकर सामने आई इन सूचनाओं के बीच अभिभावक बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, विद्यालयों के बंद रहने और आगे की शैक्षणिक गतिविधियों के संबंध में संबंधित संस्थानों की आधिकारिक सूचना को ही आधार माना जाना चाहिए।
39 जीटीसी परिसर में भी हुई तलाश, कैमरों से सुराग जुटाने का प्रयास
तेंदुए जैसे वन्यजीव की संभावित मौजूदगी को लेकर 39 जीटीसी परिसर में भी अलग-अलग स्थानों की जांच की गई थी। निगरानी कैमरों की मदद से भी सुराग तलाशने का प्रयास किया गया, लेकिन अब तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है। वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि वास्तव में तेंदुआ क्षेत्र में मौजूद है या अलग-अलग स्थानों से मिल रही सूचनाओं के कारण आशंका बनी हुई है।
बंगला नंबर 42, 43 और 61 की झाड़ियों में तलाशी की मांग
स्थानीय लोगों ने बंगला नंबर 42, 43 और 61 के आसपास फैली घनी झाड़ियों में व्यापक तलाशी अभियान चलाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि इन स्थानों पर झाड़ियां अधिक होने के कारण संभावित ठिकानों की गहन जांच जरूरी है। जब तक वन विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक लोगों के मन में भय बना रहेगा।
क्षेत्रवासियों की मांग है कि संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई जाए और लोगों को समय-समय पर अभियान की जानकारी दी जाए। इससे अफवाहों पर रोक लगाने और लोगों की चिंता कम करने में मदद मिल सकती है।
वन विभाग की अपील—वन्यजीव दिखे तो खुद पकड़ने की कोशिश न करें
फिलहाल वन विभाग की तलाश और निगरानी जारी है। अधिकारियों की ओर से वन्यजीव की मौजूदगी की पुष्टि किए जाने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। इसके बावजूद सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
यदि किसी व्यक्ति को तेंदुआ या कोई अन्य जंगली जानवर दिखाई देता है तो उसके पास जाने, पीछा करने, भीड़ जुटाने या उसे पकड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचना देनी चाहिए।
अब निगाहें वन विभाग की अगली कार्रवाई पर
वाराणसी कैंट क्षेत्र में तेंदुए की आशंका ने सुरक्षा व्यवस्था और बच्चों की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एक ओर पिंजरा लगाकर तलाश की जा रही है, वहीं दूसरी ओर ड्रोन और निगरानी कैमरों की मदद से संभावित ठिकानों को खंगाला जा रहा है। अब लोगों को वन विभाग की जांच और आधिकारिक जानकारी का इंतजार है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि क्षेत्र में वास्तव में तेंदुआ मौजूद है या नहीं।




