
- रिपोर्ट: सुरेश त्रिपाठी
बलरामपुर। जनपद बलरामपुर में शिक्षा माफिया का एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। तहसील उतरौला के विकास खंड श्रीदत्तगंज की ग्राम पंचायत निरंजनपुर में पिछले कई वर्षों से एक फर्जी विद्यालय बच्चों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ कर रहा है और जिम्मेदार विभाग कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है।
दुकान में चल रहा है स्कूल, कागज पर है पब्लिक स्कूल
ग्राम निरंजनपुर के निवासी विनोद कुमार, काशी राम, करैंची वर्मा और राजमन सहित अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में चौंकाने वाला खुलासा किया है। ग्रामीणों के मुताबिक गांव में पहले मदरसा अशरफिया अरबाई के नाम से एक मदरसा संचालित होता था।
ग्रामीणों का आरोप है कि शासन के नियमानुसार इस मदरसे की मान्यता वर्ष 2015 में ही समाप्त हो चुकी है। नियमानुसार मान्यता समाप्त होने के बाद संस्था को बंद हो जाना चाहिए था, लेकिन संचालकों ने विभाग की आंखों में धूल झोंकते हुए चालाकी से उसका नाम बदल दिया। पहले उसे यूनिक मॉडर्न पब्लिक स्कूल निरंजनपुर और अब M.A.S…M School के नाम से संचालित किया जा रहा है।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस विद्यालय का कोई निजी भवन ही नहीं है। यह विद्यालय गांव में सड़क किनारे बनी दुकानों में धड़ल्ले से और बेखौफ होकर संचालित किया जा रहा है।
दो-दो विभागों की जांच में खुल चुकी है पोल, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
ग्रामीणों का यह आरोप हवा-हवाई नहीं है। इसकी पुष्टि दो अलग-अलग विभागों की जांच रिपोर्ट में हो चुकी है, जिसकी कॉपी ग्रामीणों ने अपने प्रार्थना पत्र के साथ संलग्न की है।
पहला, अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी बलरामपुर द्वारा की गई जांच में स्पष्ट रूप से पाया गया है कि उक्त स्कूल के पास कोई भी मान्यता नहीं है और संचालक द्वारा जो मदरसे की मान्यता दिखाई जा रही है, वह काफी पहले ही समाप्त हो चुकी है।
दूसरा, मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर हुई शिकायत के बाद S.D.I. साहब द्वारा की गई जांच में भी यह पुष्टि हुई है कि विद्यालय सड़क किनारे बनी एक दुकान में चल रहा है और उसके पास मान्यता से संबंधित कोई भी वैध कागज नहीं है।
संपूर्ण समाधान दिवस से लेकर DM दरबार तक गुहार, फिर भी कार्रवाई नहीं
पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई वर्षों से इस फर्जीवाड़े की शिकायत संबंधित अधिकारियों से की है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कार्रवाई न होता देख ग्रामीणों ने फिर 19 सितंबर 2026 को संपूर्ण समाधान दिवस में भी इस मामले की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिलाधिकारी बलरामपुर को भी लिखित प्रार्थना पत्र दिया गया, लेकिन आज तक इस फर्जी स्कूल पर ताला नहीं लग सका है।
इससे बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में यह बिना मान्यता वाला विद्यालय बेखौफ चल रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिना मान्यता के चल रहे इस स्कूल में पढ़ने वाले मासूम बच्चों का भविष्य पूरी तरह से अंधकार में है। न तो उनकी पढ़ाई मान्य होगी और न ही उन्हें आगे किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय में प्रवेश मिल पाएगा।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि इस फर्जी विद्यालय को तत्काल बंद कराकर संचालक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि बच्चों के भविष्य के साथ हो रहे इस बड़े खिलवाड़ को रोका जा सके। अब देखना यह होगा कि शिकायतों और जांच रिपोर्टों के बाद भी इस अवैध विद्यालय पर कड़ी कार्रवाई हो पाएगी या फिर ग्रामीण यूं ही सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते रहेंगे और जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद में सोते रहेंगे।





