
-शंभू निषाद की पहल से नाविक समाज में खुशी की लहर, मां गंगा निषाद राज सेवा न्यास ने जताई प्रसन्नता; नाविकों की आजीविका को मिलेगी राहत
- वाराणसी मंडल ब्यूरो पंकज झा
Varanasi: धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में मां गंगा की लहरों पर नाव संचालन करने वाले नाविकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। गंगा में नाव संचालन की अनुमति मिलने के बाद नाविक समाज में खुशी का माहौल है। जारी जानकारी के अनुसार, शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 से नाविक सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक नावों का संचालन कर सकेंगे। निर्धारित समय में नाव संचालन की अनुमति मिलने से गंगा में नौका विहार करने वाले पर्यटकों, श्रद्धालुओं और नाविकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि वाराणसी में गंगा नदी पर नाव संचालन केवल रोजगार का साधन ही नहीं, बल्कि काशी की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन परंपरा का अभिन्न हिस्सा भी है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक गंगा घाटों पर पहुंचकर नौका विहार का आनंद लेते हैं तथा मां गंगा के विहंगम स्वरूप का दर्शन करते हैं। ऐसे में नाव संचालन की अनुमति मिलने से इस कार्य से जुड़े नाविकों और उनके परिवारों को आर्थिक रूप से राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
नाविक समाज के लिए राहत भरा निर्णय-
नाव संचालन की अनुमति मिलने पर शंभू निषाद, संगठन मंत्री, भारतीय जनता पार्टी, महानगर वाराणसी एवं मां गंगा निषाद राज सेवा न्यास ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इसे नाविक समाज के लिए राहत देने वाला कदम बताया। नाविकों की आजीविका और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए नाव संचालन की अनुमति को महत्वपूर्ण बताया गया।
शंभू निषाद ने नाविक समाज से अपील की कि सभी नाविक निर्धारित समय का पालन करते हुए ही नावों का संचालन करें। साथ ही यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और संबंधित प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पूरी जिम्मेदारी के साथ पालन करें। उन्होंने कहा कि गंगा में नाव संचालन के दौरान सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन करना प्रत्येक नाविक की जिम्मेदारी है, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक नौका विहार का अनुभव मिल सके।
काशी के पर्यटन और स्थानीय रोजगार के लिए महत्वपूर्ण-
वाराणसी की पहचान गंगा घाटों, मंदिरों और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी हुई है। यहां आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों के लिए गंगा में नौका विहार विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। सुबह के समय गंगा की आरती, घाटों की सुंदरता, मंदिरों के दर्शन और सूर्योदय के मनोरम दृश्य देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग नावों का सहारा लेते हैं।
नाव संचालन की अनुमति मिलने से पर्यटन गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है। इसके साथ ही नाविकों के अलावा नावों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े अन्य लोगों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। नाविक समाज के लिए नाव संचालन उनकी दैनिक आजीविका का प्रमुख साधन है। ऐसे में निर्धारित समय के अनुसार संचालन शुरू होने की सूचना उनके लिए राहत और उत्साह का विषय बनी हुई है।
मां गंगा निषाद राज सेवा न्यास ने जताई खुशी-
मां गंगा निषाद राज सेवा न्यास ने नाव संचालन की अनुमति मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे नाविक समाज के हित में महत्वपूर्ण बताया। संगठन की ओर से नाविकों के हितों, रोजगार और उनकी समस्याओं को प्रमुखता से उठाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
नाविक समाज से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि निर्धारित समय के अनुसार नाव संचालन शुरू होने से उनके कामकाज में नियमितता आएगी और परिवारों की आजीविका को सहारा मिलेगा। साथ ही, गंगा में नौका विहार करने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी सुविधा प्राप्त होगी।
सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील-
नाव संचालन की अनुमति के साथ नाविकों के लिए सुरक्षा नियमों का पालन करना भी बेहद आवश्यक है। नाविकों को प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों के अनुरूप नावों का संचालन करना चाहिए। यात्रियों की क्षमता, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और अन्य आवश्यक सावधानियों का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
कुल मिलाकर, गंगा में नाव संचालन की अनुमति मिलने से वाराणसी के नाविक समाज में खुशी का माहौल है। शंभू निषाद और मां गंगा निषाद राज सेवा न्यास ने इस निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए नाविकों के हितों तथा सुरक्षित नाव संचालन के महत्व को रेखांकित किया है। अब नाविक निर्धारित समय के अनुसार नाव संचालन कर सकेंगे, जिससे काशी की गंगा से जुड़ी धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।




