
- रिपोर्ट: प्राची सिंह
स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों का बढ़ता इस्तेमाल आंखों की सेहत को प्रभावित कर रहा है। बच्चों से लेकर बड़ों तक लंबे समय तक स्क्रीन देखने की आदत के कारण आंखों में सूखापन, जलन, थकान, सिरदर्द और कम उम्र में चश्मा लगने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक पास की वस्तुओं पर नजर टिकाए रखना, पर्याप्त नींद न लेना और असंतुलित खानपान भी आंखों की सेहत पर असर डाल सकते हैं।
बच्चों और युवाओं में बढ़ रही मायोपिया की समस्या
पहले नजर कमजोर होने को उम्र बढ़ने से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब बच्चों और युवाओं में भी मायोपिया यानी निकट दृष्टि दोष, आंखों की थकान और ड्राई आई जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं।
मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट या किताब को लंबे समय तक नजदीक से देखने की आदत आंखों पर दबाव बढ़ा सकती है। लगातार पास की वस्तुओं पर फोकस करने को नियर वर्क कहा जाता है।
स्क्रीन की रोशनी से ज्यादा लंबे समय तक पास देखना चिंता का विषय
आमतौर पर माना जाता है कि स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी ही आंखों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। हालांकि, आंखों पर डिजिटल स्क्रीन के प्रभाव में लंबे समय तक लगातार पास की वस्तु को देखते रहना और पलकें कम झपकाना भी महत्वपूर्ण कारक हैं।
लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में थकान और सूखापन जैसी परेशानी हो सकती है। बच्चों में लंबे समय तक नजदीकी गतिविधियों और कम समय बाहर बिताने को मायोपिया के बढ़ते जोखिम से जोड़ा जाता है।
प्राकृतिक रोशनी में समय बिताना फायदेमंद
बच्चों के लिए रोजाना कुछ समय बाहर प्राकृतिक रोशनी में बिताना आंखों के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, आउटडोर समय मायोपिया के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
इसलिए बच्चों को लगातार मोबाइल या अन्य स्क्रीन के सामने रखने के बजाय खेलने और बाहर गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय देना जरूरी है।
डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से भी आंखों को खतरा
आंखों की सेहत पर केवल स्क्रीन टाइम का असर नहीं पड़ता। मधुमेह और उच्च रक्तचाप भी आंखों को प्रभावित कर सकते हैं। डायबिटीज के कारण रेटिना की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी समस्या हो सकती है।
खास बात यह है कि शुरुआती चरण में कई बार इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। इसलिए मधुमेह और हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे लोगों के लिए नियमित आंखों की जांच महत्वपूर्ण है।
संतुलित आहार से भी आंखों की सेहत बेहतर रखने में मदद
आंखों की देखभाल के लिए केवल गाजर पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। संतुलित आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, ब्रोकोली, अंडे और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। ल्युटिन और ज़ेक्सैंथिन जैसे पोषक तत्व आंखों के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसके साथ पर्याप्त पानी पीना, पूरी नींद लेना और नियमित शारीरिक गतिविधि भी स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए।
इन गलतियों से बचें
- डिजिटल आई स्ट्रेन से बचने के लिए केवल ब्लू-लाइट फिल्टर चश्मे पर निर्भर न रहें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना आई ड्रॉप्स का बार-बार इस्तेमाल न करें।
- अंधेरे कमरे में लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप देखने से बचें।
- लंबे स्क्रीन टाइम के दौरान बीच-बीच में आंखों को आराम दें और दूर की वस्तुओं पर नजर डालें।
- नियमित रूप से आंखों की जांच कराएं, खासकर यदि मधुमेह या उच्च रक्तचाप जैसी बीमारी है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
यदि आंखों में लगातार सूखापन या जलन, दोहरी तस्वीर दिखाई देना, अचानक काले धब्बे या तैरते हुए कण नजर आना, तेज रोशनी की चमक दिखाई देना या लगातार सिरदर्द जैसी समस्या हो तो नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लेना चाहिए।
अचानक दिखाई देने वाले फ्लोटर्स, प्रकाश की चमक या नजर में पर्दे जैसी छाया तत्काल चिकित्सकीय जांच की जरूरत का संकेत हो सकती है।
समय पर आंखों की जांच, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्क्रीन के संतुलित इस्तेमाल से आंखों के स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल की जा सकती है।





