
- वाराणसी मंडल ब्यूरो
Varanasi. शहर के युवा पर्वतारोही प्रदीप नाथानी ने देश के प्रतिष्ठित पर्वतारोहण प्रशिक्षण संस्थानों में शामिल हिमालय पर्वतारोहण संस्थान, दार्जिलिंग से आधारभूत पर्वतारोहण प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर वाराणसी का नाम रोशन किया है। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने लगभग 16,500 फीट ऊंचे माउंट रेनोक पर्वत की सफल चढ़ाई भी पूरी की।
प्रदीप नाथानी ने पाठ्यक्रम संख्या 373 के तहत 1 मार्च 2026 से 28 मार्च 2026 तक दार्जिलिंग स्थित हिमालय पर्वतारोहण संस्थान में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन करते हुए उन्हें ‘बी’ श्रेणी, अर्थात उच्च औसत प्रदर्शन, प्रदान किया गया।
हिमालय पर्वतारोहण संस्थान भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत संचालित देश के प्रमुख पर्वतारोहण प्रशिक्षण संस्थानों में से एक है। यहां प्रशिक्षुओं को कठिन पर्वतीय परिस्थितियों में सुरक्षित एवं सफलतापूर्वक पर्वतारोहण करने के लिए विभिन्न तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाता है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रदीप नाथानी ने शैलारोहण, हिमारोहण और बर्फारोहण जैसी पर्वतारोहण की विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त किया। संस्थान की ओर से किए गए मूल्यांकन में उन्होंने इन सभी प्रशिक्षण क्षेत्रों में औसत से बेहतर प्रदर्शन किया।
कठिन एवं प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच भी प्रदीप का व्यवहार संतुलित रहा। उन्होंने पूरे प्रशिक्षण के दौरान शांत और संयमित रहकर विभिन्न चुनौतियों का सामना किया। पर्वतारोहण की तकनीकों को सीखने और उन्हें व्यवहार में उतारने के प्रति उनकी विशेष रुचि की भी सराहना की गई।
प्रशिक्षण के दौरान ऊंचाई के अनुकूलन के महत्वपूर्ण चरण में प्रदीप नाथानी ने लगभग 16,500 फीट ऊंचे माउंट रेनोक की सफल चढ़ाई पूरी की। अधिक ऊंचाई, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण पर्वतीय वातावरण के बीच इस उपलब्धि को उनके प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया।
संस्थान के मूल्यांकन में प्रदीप को शारीरिक रूप से उच्च औसत क्षमता वाला प्रशिक्षु बताया गया है। उनके प्रदर्शन को देखते हुए यह भी उल्लेख किया गया कि उनमें भविष्य में इससे भी बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता है।
पर्वतारोहण प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के साथ माउंट रेनोक की चढ़ाई पूरी करना प्रदीप नाथानी के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है। उनकी इस सफलता से वाराणसी के युवाओं में पर्वतारोहण, साहसिक खेलों और चुनौतीपूर्ण गतिविधियों के प्रति रुचि बढ़ने की उम्मीद है। प्रदीप की उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार और शुभचिंतकों, बल्कि पूरे वाराणसी को गौरवान्वित किया है।





