
शामली: उत्तर प्रदेश के शामली जिले में बुधवार दोपहर पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में एक लाख रुपये का इनामी बदमाश फुरकान मारा गया। झिंझाना थाना क्षेत्र के रंगाना फार्म के पास हुई इस कार्रवाई को प्रदेश पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है। फुरकान लंबे समय से हत्या, लूट, डकैती, रंगदारी और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामलों में वांछित था। उसके खिलाफ करीब 30 आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। पुलिस के अनुसार वह हाल के दिनों में भी लगातार आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय था और व्यापारियों को रंगदारी के लिए धमका रहा था।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक बुधवार को गश्त के दौरान सूचना मिली कि रंगाना फार्म के पास कुछ बदमाश इकट्ठा हुए हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो बदमाशों ने पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें एक बदमाश गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि उसके अन्य साथी मौके से फरार होने में सफल रहे। घायल बदमाश को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। बाद में उसकी पहचान एक लाख रुपये के इनामी अपराधी फुरकान के रूप में हुई।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार फुरकान का नाम पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधियों में शामिल था। उसका आतंक केवल कैराना तक सीमित नहीं था, बल्कि आसपास के कई जिलों तक फैला हुआ था। उसके खिलाफ लूट, हत्या, डकैती, रंगदारी और हत्या के प्रयास सहित लगभग 30 आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। वह दो बार जेल भी जा चुका था और कुछ महीने पहले ही जमानत पर बाहर आया था। जेल से रिहा होने के बाद वह फिर से अपराध की दुनिया में सक्रिय हो गया था। पुलिस का कहना है कि हाल के दिनों में वह कैराना और कांधला क्षेत्र में कई वारदातों में शामिल रहा तथा व्यापारियों को धमकाकर रंगदारी मांग रहा था।
फुरकान का नाम वर्ष 2014 में उस समय पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना था, जब कैराना में व्यापारी विनोद की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि व्यापारी ने रंगदारी देने से इनकार किया था, जिसके बाद उसकी हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद कैराना से व्यापारियों और कुछ परिवारों के कथित पलायन का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था। पुलिस का दावा है कि फुरकान को उस पूरे घटनाक्रम का प्रमुख आरोपी और मास्टरमाइंड माना जाता था।
इससे पहले भी फुरकान कई चर्चित मामलों में आरोपी रह चुका था। करीब दो दशक पहले कैराना में व्यापारी रोहताश की हत्या के बाद उसका नाम अपराध जगत में तेजी से उभरा था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उसके भय के कारण कई व्यापारी और गवाह अदालत में खुलकर गवाही देने से डरते थे। विनोद हत्याकांड के गवाहों और पीड़ित परिवार को भी लगातार धमकियां मिलने की शिकायतें सामने आती रही थीं। वर्ष 2016 में तत्कालीन कैराना सांसद हुकुम सिंह ने कैराना से व्यापारियों और हिंदू परिवारों के पलायन का मुद्दा उठाते हुए 346 परिवारों की सूची सार्वजनिक की थी।
इसी दौरान फुरकान पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया गया। वर्ष 2017 में पुलिस ने उसे कांधला क्षेत्र से गिरफ्तार किया था, लेकिन कुछ समय बाद वह जमानत पर रिहा हो गया। वर्ष 2019 में वह नशा तस्करी के मामले में फिर गिरफ्तार हुआ। वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कैराना दौरे और अपराधियों के खिलाफ तेज कार्रवाई के बीच उसने गैंगस्टर मामले में स्वयं अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था। जेल से बाहर आने के बाद वह फिर फरार हो गया और पिछले चार वर्षों से पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी।
शामली के पुलिस अधीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान पुलिस टीम ने पूरी सतर्कता के साथ कार्रवाई की। मौके से हथियार और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की गई है। फरार हुए अन्य बदमाशों की तलाश में पुलिस की विशेष टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी इसी तरह जारी रहेगा। फुरकान के मारे जाने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है, जबकि पुलिस इसे लंबे समय से वांछित अपराधी के खात्मे के रूप में बड़ी उपलब्धि मान रही है।





