
- Pankaj Jha ki kalam se ✍️✍️
वाराणसी। आसमान पर घिर आए काले-घने बादलों ने जब अपनी गड़गड़ाहट से फिज़ाओं को गूंजा दिया और फिर झमाझम बारिश की बूंदें धरती की गोद में उतरने लगीं, तो ऐसा लगा मानो प्रकृति ने प्रेम, सुकून और सौंदर्य का अनुपम उत्सव सजा दिया हो। हर बूंद अपने साथ ताज़गी, नई उम्मीद और अनगिनत खुशियों की सौगात लेकर आई।
रिमझिम फुहारों ने तपती धूप और उमस को पलभर में विदा कर दिया। ठंडी-ठंडी हवाओं ने पेड़ों की डालियों को झूमने पर मजबूर कर दिया, फूलों की भीनी-भीनी खुशबू ने वातावरण को महका दिया और चारों ओर फैली हरियाली ने धरती का ऐसा मनमोहक श्रृंगार किया कि हर नज़र बस उसे निहारती रह गई।
बारिश का यह मौसम केवल पानी की बूंदों का नहीं, बल्कि यादों, एहसासों और अनकहे जज़्बातों का मौसम बन गया। भीगी हुई सड़कें, छतों पर पड़ती बूंदों की मधुर सरगम और मिट्टी की सोंधी महक ने हर दिल को रोमांटिक एहसासों से भर दिया। ऐसा प्रतीत हुआ मानो पूरी कायनात प्रेम के रंग में रंगकर मुस्कुरा उठी हो।
गरजते बादलों की गूंज, बारिश की झमाझम फुहारें, बच्चों की खिलखिलाती हंसी, हाथों में गर्मागर्म चाय की प्याली और पकौड़ों की महक—इन सबने मिलकर इस मौसम को यादगार ही नहीं, बल्कि दिल में हमेशा के लिए बस जाने वाला बना दिया।
सचमुच, प्रकृति जब अपने इस मोहक रूप में मुस्कुराती है, तो हर दिल यही दुआ करता है कि यह सुहाना मौसम यूँ ही ठहरा रहे, हर बूंद मोहब्बत का पैगाम बनकर बरसती रहे और ज़िंदगी के हर पल को ताज़गी, खुशियों और अनमोल यादों से महकाती रहे।





