
- रिपोर्ट: प्राची सिंह
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निकाह, हलाला और तीन तलाक से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि इन प्रथाओं की आड़ में महिलाओं के यौन शोषण की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि यदि धार्मिक या व्यक्तिगत कानून (पर्सनल लॉ) के नाम पर किसी महिला के साथ अपराध किया जाता है, तो ऐसे मामलों में आपराधिक कानून सर्वोपरि रहेगा। कोर्ट ने आरोपियों द्वारा एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।
‘पर्सनल लॉ अपराध का संरक्षण नहीं बन सकता’
न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने पीड़िता के पूर्व पति, चाचा, मौलाना और अन्य आरोपियों की याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि जब मामला आपराधिक अपराध से जुड़ा हो, तब पर्सनल लॉ का हवाला देकर कानूनी कार्रवाई से बचा नहीं जा सकता। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर प्रकृति का प्रतीत होता है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। ऐसे में इस स्तर पर एफआईआर रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता।
नाबालिग अवस्था में निकाह और हलाला का आरोप
एफआईआर के अनुसार, मामला अमरोहा जिले के सैदनागली थाना क्षेत्र का है। पीड़िता का आरोप है कि वर्ष 2015 में, जब वह नाबालिग थी, उसका जबरन निकाह कराया गया। बाद में उसे तीन तलाक दिया गया और दोबारा विवाह से पहले कथित रूप से ‘निकाह हलाला’ कराया गया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के दौरान उसके साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध दुष्कर्म किया गया और बाद में उसका फिर से पूर्व पति के साथ निकाह करा दिया गया।
‘डबल हलाला’ के नाम पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप
शिकायत के अनुसार, कुछ वर्षों बाद पूर्व पति द्वारा दोबारा तलाक दिए जाने के बाद पीड़िता को परिवार में वापस लाने के लिए कथित रूप से ‘डबल हलाला’ करने का दबाव बनाया गया। पीड़िता का आरोप है कि इसी बहाने वर्ष 2025 में उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया और बाद में एक कथित निकाह भी कराया गया। घटना के बाद पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर मामला दर्ज किया गया।
जांच जारी, आरोप अभी साबित नहीं
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच जारी रहेगी और सभी तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल की जाएगी। अदालत ने कहा कि जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की सत्यता तय होगी। फिलहाल आरोपियों को एफआईआर रद्द कराने जैसी कोई राहत देने का आधार नहीं है।




