
- जन जन की आवाज Pankaj Jha ✍️✍️
वाराणसी नगर निगम ने काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र के 2 किलोमीटर दायरे में मांस और शराब की बिक्री पर रोक लगाने का प्रस्ताव पारित किया था। इसका उद्देश्य काशी की धार्मिक गरिमा और श्रद्धालुओं की भावनाओं की रक्षा सुनिश्चित करना बताया गया था, लेकिन जमीनी स्थिति इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
लक्सा, बेनियाबाग,सराय गोवर्धन, नई सड़क सहित कई क्षेत्रों में शराब के ठेके आज भी खुलेआम संचालित हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब प्रतिबंध का प्रस्ताव लागू बताया गया था, तो इन ठेकों को लाइसेंस किस आधार पर जारी किए गए? और यह पूरा कारोबार आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है?
यदि प्रतिबंध वास्तव में लागू है, तो आबकारी विभाग ने अनुमति कैसे प्रदान की? और यदि लागू नहीं है, तो जनता को इसकी स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई? करोड़ों रुपये की लागत से विकसित काशी विश्वनाथ धाम के भव्य स्वरूप के बीच मंदिर परिक्षेत्र के आसपास शराब बिक्री की मौजूदगी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रही है।
अब जनता प्रशासन, नगर निगम और आबकारी विभाग से स्पष्ट जवाब की मांग कर रही है। सवाल सीधा है—क्या शराबबंदी का प्रस्ताव केवल कागज़ों तक सीमित रह गया है, या फिर इसके पालन की कोई ठोस व्यवस्था भी मौजूद है?





