
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर सख्त रुख अपनाते हुए जल संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में चेनाब-ब्यास लिंक परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसके तहत हिमाचल प्रदेश में चंद्रा और भागा नदियों के जल को ब्यास नदी बेसिन से जोड़ने की योजना पर कार्य किया जा रहा है।
यह परियोजना लगभग 2,600 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जा रही है। इसके अंतर्गत चंद्रा और भागा नदियों के पानी को 8.7 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग के माध्यम से ब्यास नदी प्रणाली में मोड़ा जाएगा। इसके बाद 113 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली के जरिए इस जल का उपयोग सिंचाई और अन्य विकास कार्यों में किया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, परियोजना के पूरा होने पर हर वर्ष लगभग 19 लाख एकड़ फीट अतिरिक्त जल ब्यास बेसिन में पहुंचाया जा सकेगा। इससे पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान जैसे राज्यों को लाभ मिलने की संभावना है। विशेष रूप से जल संकट और सिंचाई की चुनौतियों से जूझ रहे क्षेत्रों को इससे राहत मिल सकती है।
परियोजना से कृषि क्षेत्र को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन में भी वृद्धि की उम्मीद है। अनुमान है कि इससे करीब 4,000 मेगावाट अतिरिक्त जलविद्युत उत्पादन की संभावना बनेगी, जिससे देश की ऊर्जा जरूरतों को मजबूती मिलेगी।
सिंधु जल संधि के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के जल बंटवारे की व्यवस्था लंबे समय से लागू रही है। हाल के घटनाक्रमों के बाद भारत अपने हिस्से के जल संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर विशेष ध्यान दे रहा है। इसी रणनीति के तहत विभिन्न जल परियोजनाओं को गति दी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चेनाब-ब्यास लिंक परियोजना केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं है, बल्कि जल प्रबंधन, कृषि विकास और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आने वाले वर्षों में यह परियोजना उत्तर भारत के विकास और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है।




