
नई दिल्ली/वाराणसी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi के खिलाफ दायर एक आपराधिक शिकायत मामले में वाराणसी की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली शिकायत को लेकर दाखिल पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है और मामले पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया है।
विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने अधिवक्ता हरिशंकर पांडे की ओर से दाखिल आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। इससे पहले अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) ने शिकायत को विचारणीय न मानते हुए खारिज कर दिया था।
पुनरीक्षण अदालत ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता को पर्याप्त सुनवाई का अवसर दिए बिना शिकायत को प्रारंभिक स्तर पर खारिज कर दिया गया था। इसलिए मामले को कानून के अनुसार पुनर्विचार के लिए वापस भेजा जाता है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने अमेरिका के बोस्टन स्थित ब्राउन यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भगवान राम को “पौराणिक और काल्पनिक पात्र” बताया था। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस कथित बयान से सनातन धर्म के अनुयायियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तथा सामाजिक वैमनस्य फैलाने का प्रयास हुआ है।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि कथित बयान संसद की कार्यवाही के दौरान नहीं, बल्कि विदेश में आयोजित एक कार्यक्रम में दिया गया था। ऐसे में मामले पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधानों के तहत न्यायिक परीक्षण आवश्यक है।
हरिशंकर पांडे ने एसीजेएम के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया था कि किसी मौजूदा सांसद के खिलाफ कार्रवाई से पहले लोकसभा अध्यक्ष की अनुमति आवश्यक है। पुनरीक्षण अदालत ने निचली अदालत का आदेश निरस्त करते हुए शिकायत पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया है।
मूल शिकायत में All India Congress Committee को भी पक्षकार बनाया गया था। शिकायतकर्ता का तर्क है कि पार्टी अपने वरिष्ठ नेता के कथित बयान से पूरी तरह अलग नहीं हो सकती।
अब मामले में निचली अदालत शिकायत और उपलब्ध तथ्यों पर कानून के अनुसार दोबारा विचार करेगी।



