
नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर उसके संभावित असर को लेकर केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। सोमवार को रक्षा मंत्री Rajnath Singh की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला, ईंधन उपलब्धता और आवश्यक वस्तुओं के भंडारण व वितरण व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई।
सरकार ने देशवासियों को भरोसा दिलाया है कि किसी भी आवश्यक वस्तु की कमी नहीं होने दी जाएगी और आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव पर सरकार की नजर
दरअसल, पश्चिम एशिया में Iran और Israel के साथ अमेरिका के बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट से मालवाहक जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ा है, जहां से दुनिया के कई देशों को कच्चे तेल और गैस की बड़ी सप्लाई होती है।
इसी स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर अंतर-मंत्रालयी समूह की पांचवीं बैठक आयोजित की।
कई केंद्रीय मंत्री बैठक में रहे मौजूद
बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री JP Nadda, पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri, केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju, बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री Sarbananda Sonowal और नागरिक उड्डयन मंत्री Kinjarapu Ram Mohan Naidu समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।
घबराहट में खरीदारी न करने की अपील
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में सरकार देश में आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियां मिलकर ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए समन्वित प्रयास कर रही हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे शांत रहें और किसी भी प्रकार की घबराहट या अनावश्यक खरीदारी से बचें। सरकार के अनुसार देश में आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
ऊर्जा बचत को बताया राष्ट्रीय जिम्मेदारी
बैठक में यह भी कहा गया कि वैश्विक चुनौतियों के इस दौर में संसाधनों के संरक्षण और ऊर्जा बचत की दिशा में सामूहिक भागीदारी बेहद जरूरी है। सरकार ने जिम्मेदार उपभोग और ऊर्जा संरक्षण को आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय हित से जोड़ते हुए इसे व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया है।





