
-हर साल नहीं बदलेगी ड्रेस, स्कूल नहीं माने तो रद्द होगी मान्यता।
-सख्त संदेश जिला शुल्क नियामक समिति की हुई समीक्षा बैठक।
- रिपोर्ट: ज्ञानेश वर्मा
नोएडा। आजकल उत्तर प्रदेश में शिक्षा के मंदिर में जिस तरह से नए एडमिशन रि एडमिशन कापी किताबें स्टेशनरी जूते मोजे के नाम पर मोटी रकम हर माह वसूली जा रही है। जिसकी वजह से अभिभावक सिर्फ हाय कर कर रह जाता है लेकिन इन शिक्षा माफिया के आगे अभिभावको की एक भी नहीं चलती अभिभावक हर जिले में लगातार शिकायत करते आ रहे हैं और परेशान भी हो रहे हैं लेकिन शिकायतों के बाद भी कोई उनकी समस्या की तरफ ध्यान नहीं दे रहा है न तो शिक्षा विभाग से समाधान नहीं मिल पा रहा है न तो जिले के जिम्मेदार अफसर ध्यान दें रहे हैं लेकिन आपको बता दूं कि यह बड़ी खबर है डीएम ग्रेटर नोएडा ने बाकी जिलों के लिए एक संदेश दिया है पूरा मामला यह है कि निजी स्कूल 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) 2018 में दिए गए प्रावधानों के तहत 7.23 फीसदी ही फीस वृद्धि कर सकते हैं। उसे भी स्कूल की वेबसाइट पर अपलोड करना होगा।
एनसीईआरटी की ओर से प्रकाशित पुस्तकों से पठन-पाठन को प्राथमिकता से प्रोत्साहित किया जाए। हर साल विद्यालय में किताबें न बदली जाएं। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले अगर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके बाद भी शिकायत मिलती है तो स्कूल की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। ग्रेटर नोएडा कलेक्ट्रेट सभागार में मंगलवार को हुई जिला शुल्क नियामक समिति की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने विद्यालयों को सख्त हिदायत दी हैं। इस बैठक में अभिभावकों की शिकायतों को प्रशांत सिंह ने रखा। आपको बता दें अगर विद्यालय के प्रबंधक प्रिंसिपल वी टीचर डीएम के आदेश भी नहीं मानते हैं तो अभिभावक व गर्जन यहां शिकायत भी कर सकते हैं।
यदि किसी अभिभावक को विद्यालय की फीस वृद्धि और अन्य कोई शिकायत करना चाहता है तो जिला शुल्क नियामक समिति की ईमेल आईडी– feecommitteegbn@gmail.com पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
कमेटी ने निर्णय किया कि विद्यालय में अध्ययनरत छात्रों को किताबें, ड्रेस, जूते, मोजे आदि किसी विशिष्ट दुकान से लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। स्कूल से पांच निरंतर शैक्षणिक वर्षों के भीतर बच्चों की ड्रेस में परिवर्तन नहीं किया जाए। यदि परिवर्तन जरूरी हो तो जनपदीय शुल्क नियामक समिति के समक्ष प्रस्ताव व अनुमोदन के बिना परिवर्तन न करें। मीटिंग में यह भी तय हुआ कि स्कूलों में स्विमिंग पूल में महिला व पुरुष कोच अनिवार्य करना होगा।




