
- रिपोर्ट: स्निग्धा श्रीवास्तव
नई दिल्ली। सरकार 1 फरवरी से सिगरेट, तंबाकू उत्पादों और पान मसाले के लिए नया टैक्स स्ट्रक्चर लागू कर रही है। इसका उद्देश्य इन “सिन गुड्स” पर रेगुलेशन को और सख्त करना और टैक्स की दरों को उच्च बनाए रखना है। अब सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लगेगी, जबकि पान मसाले पर नया हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस लागू होगा। ये नए टैक्स पुराने सिस्टम की जगह लेंगे, जिसमें जुलाई 2017 में GST लागू होने के बाद 28 प्रतिशत GST के साथ कंपनसेशन सेस लगती थी।
सरकार ने चबाने वाला तंबाकू, फिल्टर खैनी, जरदा सुगंधित तंबाकू और गुटखा जैसे उत्पादों के लिए नया MRP-आधारित वैल्यूएशन सिस्टम शुरू किया है। इस नए सिस्टम के तहत GST की गणना फैक्ट्री वैल्यू के बजाय पैकेट पर छपी रिटेल कीमत के आधार पर होगी। इसका उद्देश्य टैक्स चोरी को कम करना और रेवेन्यू कलेक्शन में सुधार करना है।
पान मसाला निर्माता कंपनियों को 1 फरवरी से नए हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस कानून के तहत रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही कंपनियों को अपनी फैक्ट्रियों में सभी पैकिंग मशीनों को कवर करने वाले CCTV कैमरे लगाने होंगे और वीडियो रिकॉर्डिंग कम से कम दो साल तक स्टोर करनी होगी। इसके अलावा, उन्हें एक्साइज अधिकारियों को मशीनों की संख्या और उत्पादन क्षमता की जानकारी भी देनी होगी। यदि कोई मशीन लगातार 15 दिनों तक काम नहीं करती है, तो निर्माता उस अवधि के लिए एक्साइज ड्यूटी में छूट का दावा कर सकते हैं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए बदलावों के बावजूद पान मसाले पर कुल टैक्स का बोझ, जिसमें 40 प्रतिशत GST शामिल है, मौजूदा 88 प्रतिशत के स्तर के आसपास ही रहेगा।





