
- रिपोर्ट: अमित कुमार
सरयू नदी की प्राकृतिक संपदा लूटने वालों पर कठोर कार्रवाई की मांग, दोषियों को काली सूची में डालने की अपील
अयोध्या। श्री आदित्यनाथ गौ सेवा समिति के संरक्षक राजेश सिंह मानव ने सोमवार को आयोजित प्रेसवार्ता में सरयू नदी पर हो रहे अवैध खनन और प्राकृतिक संसाधनों की लूट पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि खनन माफिया सरयू जी का स्वरूप बिगाड़ते हुए निरंतर पर्यावरण को भारी क्षति पहुँचा रहे हैं, जिसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों और संबंधित फर्म को काली सूची में डालने तथा उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है।
राजेश सिंह मानव ने आरोप लगाया कि मार्च 2025 से 2030 तक मिले पट्टे की आड़ में राकेश जायसवाल, सरोज जायसवाल और संतोष कुमार द्वारा जगह-जगह पोकलैंड, जेसीबी और प्रतिबंधित मशीनों का उपयोग कर दिन-रात अवैध खनन किया जा रहा है। उनके अनुसार, इन मशीनों की मदद से डंपरों के माध्यम से प्राकृतिक संपदा की खुलेआम लूट चल रही है।
उन्होंने बताया कि फतेपुर सरैया में पाँच वर्षीय पट्टे का बहाना बनाकर मौजा फतेपुर सरैया से लेकर माँझा कला, माँझा तिहुरा, आंशिक माँझा सीतारामपुर और दशरथ समाधि तक पूरे अयोध्या जनपद में अवैध बालू खनन जारी है। इस अवैध सिंडिकेट के दबाव में खनन विभाग “करबद्ध होकर घुटने टेक चुका है।”
राजेश सिंह मानव ने कहा कि खनन माफिया ने सरयू जी की मूल धारा को परिवर्तित कर दिया है, जिससे न सिर्फ नदी का स्वरूप बिगड़ रहा है, बल्कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों की भी खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इस अवैध खनन से सरयू जी की पवित्रता क्षीण हो रही है और प्राकृतिक संपदा का दोहन लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने आगे बताया कि इन गतिविधियों का गंभीर असर स्थानीय किसानों, खासकर गोण्डा और बस्ती के तराई क्षेत्रों पर पड़ रहा है। अवैध खनन के कारण जहाँ फसलों को भारी क्षति का खतरा है, वहीं संक्रामक बीमारियों की संभावना भी बढ़ गई है।
प्रेसवार्ता में यह भी खुलासा किया गया कि खनन माफिया को केवल फतेपुर सरैया की गाटा संख्या 13घ का पट्टा दिया गया है, जिसका सीमांकन तक नहीं हुआ है। फिर भी अवैध खनन गाटा संख्या 79, 80 (मौजा माँझा कला), तथा गाटा संख्या 89, 109 (माँझा सीतारामपुर) सहित कई स्थानों पर प्रतिबंधित मशीनों से धड़ल्ले से चलाया जा रहा है।
राजेश सिंह मानव ने कहा कि इस अवैध खनन और प्राकृतिक संपदा की लूट से स्थानीय जनमानस, संत समाज और पर्यावरण प्रेमियों में भारी रोष है। उन्होंने मांग की कि दोषियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए और उन्हें ब्लैकलिस्ट कर भविष्य में किसी भी प्रकार के पट्टे से वंचित किया जाए।
प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और सरयू जी की पवित्रता बचाने के लिए आंदोलन तेज करने की भी चेतावनी दी गई।




