
- वाराणसी मंडल ब्यूरो
Varanasi: धोखाधड़ी एवं कूटरचना के आरोप में अदालत ने बहन समेत तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है। आरोप है कि पिता की संपत्ति को गलत तथ्यों के आधार पर लीज कराया गया और उसी संपत्ति का उपयोग कर विद्यालय का लाइसेंस प्राप्त किया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार की अदालत ने यह आदेश प्रार्थी शैलेन्द्र कुमार वर्मा की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद दिया।
प्रकरण के अनुसार कश्मीरीगंज, भेलूपुर निवासी शैलेन्द्र कुमार वर्मा ने अपने अधिवक्ता अनुज यादव एवं नरेश यादव के माध्यम से अदालत में बीएनएनएस की धारा 173(4) के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया कि उनके स्वर्गीय पिता जित्तूराम वर्मा के स्वामित्व वाले दो भवन—मकान संख्या बी-24/70ए एवं बी-24/70 तथा स्वर्गीय माता राजमनी वर्मा के नाम दर्ज भवन संख्या बी-24/64—के वारिस एवं उत्तराधिकारी के रूप में प्रार्थी और उनकी बहन सुषमा रतन हैं।
प्रार्थना पत्र में बताया गया कि उक्त तीनों भवनों के संबंध में बहन सुषमा रतन की सहमति एवं अनापत्ति के आधार पर वर्ष 2023 में राजस्व अभिलेखों में प्रार्थी शैलेन्द्र कुमार वर्मा का नाम बतौर स्वामी दर्ज हुआ।
आरोप है कि इसी बीच सुषमा रतन ने कथित रूप से छल एवं धोखाधड़ी की नीयत से गलत और असत्य तथ्यों के आधार पर 03 दिसंबर 2022 को भवन संख्या बी-24/70ए के संबंध में एक लीज डीड पंजीकृत करा ली। आरोप के मुताबिक इस दस्तावेज में उन्होंने स्वयं को उक्त भवन की स्वामिनी और बनारस पब्लिक स्कूल की प्रबंधक बताया।
प्रार्थी की ओर से अदालत में यह भी आरोप लगाया गया कि उक्त लीज डीड के पृष्ठ संख्या-3 पर वर्णित शर्त संख्या-1 में लीज की अवधि 18 जून 2000 से 30 वर्ष अंकित की गई है, जबकि लीज डीड स्वयं 03 दिसंबर 2022 को तैयार एवं पंजीकृत हुई थी।
प्रार्थी का दावा है कि वर्ष 2000 में संबंधित भवन उनके पिता स्वर्गीय जित्तूराम वर्मा के नाम बतौर स्वामी दर्ज था और वर्ष 2023 तक राजस्व अभिलेखों में उन्हीं का नाम दर्ज रहा। इसके बाद सुषमा रतन की सहमति एवं अनापत्ति के आधार पर वर्ष 2023 में भवन पर प्रार्थी का नाम बतौर स्वामी दर्ज किया गया।
प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया कि इसके बावजूद वर्ष 2022 में तैयार कराई गई लीज डीड में सुषमा रतन द्वारा स्वयं को भवन की स्वामिनी बताया जाना गलत एवं असत्य है। आरोप है कि विद्यालय के संचालन वाली संपत्ति को कथित रूप से हड़पने के उद्देश्य से जाली एवं कूटरचित लीज डीड तैयार कराई गई और उसे विद्यालय का लाइसेंस प्राप्त करने के लिए संबंधित विभाग के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
मामले में अदालत ने प्रार्थी के अधिवक्ता की दलील सुनने के बाद सुषमा रतन, नील रतन एवं नंदा रतन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश कैंट पुलिस को दिया है।
अब पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज कर पूरे मामले की विवेचना की जाएगी। विवेचना के दौरान लीज डीड, राजस्व अभिलेखों, विद्यालय के लाइसेंस से संबंधित दस्तावेजों तथा अन्य तथ्यों की जांच के बाद मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।




