
गौतमबुद्धनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 19 वर्षीय युवती की गला दबाकर हत्या करने के मामले में आरोपी धनंजय को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश एवं फास्ट ट्रैक कोर्ट-द्वितीय के न्यायाधीश सत्येंद्र सिंह ने आरोपी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने आदेश दिया कि जुर्माने की राशि में से 40 हजार रुपये मृतका के माता-पिता को प्रतिकर के रूप में दिए जाएंगे। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में आरोपी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन के अनुसार, मृतका निशा कुमारी (19) के पिता ओमप्रकाश ने 28 मार्च 2024 को थाना सेक्टर-63 में आरोपी धनंजय के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायत में बताया गया कि 27 मार्च 2024 को आरोपी उनकी बेटी को अपने साथ ले गया था। इसके बाद सेक्टर-63 क्षेत्र स्थित आरोपी के किराए के कमरे से युवती का शव बरामद हुआ। घटना के बाद पुलिस ने अपहरण और हत्या की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
पुलिस विवेचना के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी क्राइम शिल्पी भदौरिया ने अदालत के समक्ष मजबूत परिस्थितिजन्य साक्ष्य पेश किए। अदालत ने पाया कि मृतका को आखिरी बार आरोपी धनंजय के साथ देखा गया था और उसके बाद वह किसी अन्य व्यक्ति के संपर्क में नहीं आई। साथ ही युवती का शव आरोपी के कमरे से बरामद हुआ, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई।
सुनवाई के दौरान हत्या में प्रयुक्त कपड़े की पट्टी की बरामदगी, घटना के बाद आरोपी का फरार होना तथा अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए, जिन्हें न्यायालय ने आरोपी के खिलाफ महत्वपूर्ण माना।
अपने फैसले में अदालत ने कहा कि आरोपी पहले से शादीशुदा था, लेकिन उसके मृतका के साथ प्रेम संबंध थे। युवती आरोपी पर शादी करने का दबाव बना रही थी और इसी दबाव से बचने के लिए उसने उसकी हत्या कर दी। न्यायालय ने इसे हत्या का स्पष्ट उद्देश्य माना।
अदालत ने यह भी कहा कि जब किसी व्यक्ति के कमरे से उसके साथ मौजूद युवती का शव बरामद होता है तो घटना की परिस्थितियों का संतोषजनक स्पष्टीकरण देना उसकी जिम्मेदारी होती है, लेकिन आरोपी ऐसा करने में पूरी तरह विफल रहा। न्यायालय ने माना कि आरोपी ने विश्वास का दुरुपयोग करते हुए युवती को अपने साथ ले जाकर उसकी निर्मम हत्या की। उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों की पूरी श्रृंखला से अपराध सिद्ध होने पर अदालत ने आरोपी को किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार करते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।




