
-बाढ़ का पानी उतरते ही नगर निगम ने तेज की सफाई की तैयारी, घाटों की सीढ़ियों और प्लेटफॉर्म से गाद हटाने के निर्देश; लापरवाही मिलने पर होगी कठोर कार्रवाई
- वाराणसी मंडल ब्यूरो
वाराणसी। मां गंगा के जलस्तर में कमी आने के साथ ही गंगा घाटों पर जमा सिल्ट (गाद) की सफाई को लेकर नगर निगम ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। श्रद्धालुओं और पर्यटकों को घाटों पर आवागमन में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने व्यापक कार्ययोजना तैयार करते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को जिम्मेदारियां सौंप दी हैं। आदिकेशव घाट से लेकर रविदास घाट और रामघाट तक कुल 85 गंगा घाटों को अलग-अलग जोन और क्लस्टर में विभाजित कर सफाई कार्य की निगरानी के लिए पर्यवेक्षणीय एवं नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है।
नगर आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि घाटों की सफाई केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि सीढ़ियों और प्लेटफॉर्म पर जमा गाद को पूरी तरह हटाकर उसका तत्काल निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। सफाई कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रतिदिन घाटों का निरीक्षण करेंगे अधिकारी, साझा करनी होगी जियोटैग तस्वीरें
गंगा घाटों पर सिल्ट सफाई कार्य की प्रभावी निगरानी के लिए अधिकारियों को नियमित रूप से स्थलीय निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है। प्रत्येक पर्यवेक्षणीय अधिकारी को अपने आवंटित घाट का प्रतिदिन निरीक्षण करना होगा और सफाई कार्य की वास्तविक स्थिति दर्शाने वाली जियोटैग तस्वीरें ‘ऑफिसर्स ग्रुप’ में साझा करनी होंगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सफाई कार्य की नियमित निगरानी, कार्यों की प्रगति का आकलन और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है। तस्वीरों के माध्यम से घाटों पर सफाई की वास्तविक स्थिति की जानकारी भी प्राप्त की जा सकेगी।
तीन दिनों के भीतर देनी होगी प्रगति रिपोर्ट
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्थलीय निरीक्षण के बाद तीन दिनों के भीतर विस्तृत प्रगति आख्या प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट में सिल्ट सफाई कार्य की वर्तमान स्थिति, अब तक हुई प्रगति, शेष बचे कार्य और आवश्यक सुधार से संबंधित बिंदुओं को शामिल करना होगा।
उन्होंने निर्देशित किया है कि अधिकारी अपने आवंटित घाटों की स्थिति का गंभीरता से आकलन करें और जहां कहीं भी सफाई कार्य में कमी दिखाई दे, वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। सफाई व्यवस्था में शिथिलता या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
कई वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई घाटों की जिम्मेदारी
गंगा घाटों की सफाई व्यवस्था को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम के कई वरिष्ठ अधिकारियों को विभिन्न घाटों का प्रभार सौंपा गया है। इनमें अपर नगर आयुक्त दुर्गेश कुमार मिश्रा, विनोद कुमार गुप्ता और पवन कुमार गुप्ता, सहायक नगर आयुक्त अनिल यादव, जोनल अधिकारी इन्द्र विजय, मनोज कुमार सिंह और मृत्युंजय नारायण मिश्रा शामिल हैं।
इसके अलावा प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी संदीप भार्गव, जोनल स्वच्छता अधिकारी क्षितिज मिश्रा और राजीव कुमार तथा संयुक्त नगर आयुक्त कृष्णचंद्र को भी विभिन्न घाटों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।
सभी संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में सफाई कार्य की नियमित समीक्षा करने और निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
घाटों पर गाद जमा छोड़ने की मनाही, तत्काल होगा निस्तारण
नगर निगम की कार्ययोजना में केवल सिल्ट हटाने पर ही नहीं, बल्कि निकाली गई गाद के उचित निस्तारण पर भी विशेष जोर दिया गया है। निर्देश के अनुसार, घाटों की सीढ़ियों और प्लेटफॉर्म से निकाली गई सिल्ट को वहीं जमा छोड़ने के बजाय तत्काल उठाकर निर्धारित स्थलों पर निस्तारित किया जाएगा।
इससे घाटों पर दोबारा गंदगी फैलने की आशंका कम होगी और श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों तथा पर्यटकों को आने-जाने में परेशानी नहीं होगी। साथ ही घाटों की स्वच्छता और व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
निगरानी और जवाबदेही के जरिए बेहतर सफाई व्यवस्था पर जोर
गंगा घाट वाराणसी की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन संबंधी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में बाढ़ के बाद घाटों पर जमा सिल्ट को समय से हटाना और साफ-सफाई की व्यवस्था बनाए रखना नगर निगम के लिए अहम जिम्मेदारी है।
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल की ओर से अधिकारियों की तैनाती, प्रतिदिन निरीक्षण, जियोटैग तस्वीरें साझा करने और तीन दिनों के भीतर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने जैसे निर्देशों के जरिए सफाई अभियान की निगरानी को व्यवस्थित करने पर जोर दिया गया है।




