
नई दिल्ली। भारत-चीन सीमा पर अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों में भारतीय सुरक्षा बलों और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के जवानों के बीच आमना-सामना होने की जानकारी सामने आई है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर के अनुसार, कुछ स्थानों पर ऐसी स्थितियां बनी हुई हैं। उन्होंने इन परिस्थितियों में तैनात ITBP की विशेष कमांडो टीमों ‘शौर्य कमांडो’ के प्रदर्शन की सराहना की।
ITBP के 65वें स्थापना दिवस से पहले आयोजित सम्मान समारोह में बल की परिचालन क्षमता बढ़ाने और आधुनिकीकरण की योजनाओं की जानकारी दी गई। इनमें कमांडो इकाइयों का विस्तार, ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल और एंटी-ड्रोन प्रणालियों को मजबूत करना शामिल है।
हर बटालियन में कमांडो टीम, अलग बटालियन बनाने की भी तैयारी
ITBP प्रमुख के मुताबिक, बल की प्रत्येक बटालियन में एक कमांडो टीम तैयार की जा चुकी है। अब दो और टीमों के गठन की प्रक्रिया चल रही है। भविष्य में प्रत्येक बटालियन में एक पूर्ण कमांडो कंपनी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा, केवल कमांडो अभियानों के लिए अलग बटालियन गठित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इन विशेष इकाइयों का उद्देश्य कठिन परिस्थितियों में बल की त्वरित प्रतिक्रिया और परिचालन क्षमता को बेहतर बनाना है।
ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक पर करीब 1,000 करोड़ रुपये की योजना
सीमा पर बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच ITBP ड्रोन तकनीक को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। कपूर ने कहा कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका बढ़ी है, इसलिए सुरक्षा बलों को अपनी रणनीतियों और तकनीकी क्षमताओं में बदलाव करना होगा।
प्रस्तावित योजनाओं में प्रत्येक प्लाटून में ड्रोन यूनिट बनाने, ड्रोन संचालन के लिए पायलटों को प्रशिक्षित करने और ड्रोन निर्माण क्षमता बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं। ITBP के आधुनिकीकरण के तहत वर्ष 2030 तक अतिरिक्त वित्तीय संसाधन मिलने की उम्मीद जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों के लिए करीब 1,000 करोड़ रुपये निर्धारित करने की योजना है।
हालांकि, इस बजट और अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी अंतिम आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही इनकी स्थिति स्पष्ट होगी।
आधुनिक वाहन और सैन्य उपकरण भी होंगे मजबूत
ITBP की आधुनिकीकरण योजना में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में चलने वाले वाहन, स्वचालित जमीनी वाहन (Autonomous Ground Vehicles) और त्वरित प्रतिक्रिया वाहन (Quick Reaction Vehicles) शामिल करने पर भी विचार किया जा रहा है।
इसके साथ ही हथियारों, गोला-बारूद और अन्य सैन्य उपकरणों को आधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य पर्वतीय इलाकों में निगरानी, आवाजाही और आपात परिस्थितियों में कार्रवाई की क्षमता बढ़ाना है।
LAC पर अलग-अलग धारणाओं के कारण आमना-सामना
भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को लेकर दोनों देशों की धारणाएं कुछ क्षेत्रों में अलग-अलग हैं। ऐसे इलाकों में गश्त के दौरान सैनिकों के बीच आमना-सामना और तनाव की स्थितियां पैदा होती रही हैं।
रिपोर्ट में सितंबर में दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर की बैठक का भी उल्लेख किया गया है। इन वार्ताओं का उद्देश्य सीमा पर तनाव कम करना और लंबित मुद्दों के समाधान की दिशा में आगे बढ़ना रहा है।
अरुणाचल प्रदेश में सामने आई स्थितियों के बीच ITBP कमांडो इकाइयों के विस्तार और आधुनिक तकनीक पर निवेश को सीमा सुरक्षा की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, नई इकाइयों के गठन, बजट और योजनाओं की समयसीमा को लेकर अंतिम विवरण की पुष्टि आवश्यक है।




