
अयोध्या: जब सरकारी ब्लड बैंक ने हाथ खड़े कर दिए, तब ‘ब्लड मैन’ डॉ. आशीष पाण्डेय ‘दीपू’ ने मानवता की मिसाल पेश कर दी। 12 साल की जानवी मिश्रा की सांसें महज 4% हीमोग्लोबिन पर अटकी थीं, और दुर्लभ A-नेगेटिव ब्लड कहीं नहीं मिल रहा था। दीपू ने न सिर्फ दो यूनिट ब्लड का इंतजाम कराया, बल्कि बच्ची को खुद अस्पताल में भर्ती कराकर जान बचा ली।
बुखार ने घटाया हीमोग्लोबिन, 4 पर पहुंची जान
सोहावल के ड्योढ़ी बाजार निवासी किसान आशीष मिश्रा की बेटी जानवी कई दिन से तेज बुखार से जूझ रही थी। खून की कमी से हीमोग्लोबिन खतरनाक स्तर 4% पर पहुंच गया। A-नेगेटिव जैसा दुर्लभ ग्रुप होने से मुसीबत और बढ़ गई। दर्शननगर मेडिकल कॉलेज ने साफ कह दिया- “ब्लड उपलब्ध नहीं है।”
दीपू को कॉल, फिर दौड़ी ‘डोनर टीम’
परेशान पिता ने संकल्प संस्थान के अध्यक्ष डॉ. आशीष पाण्डेय ‘दीपू’ को फोन लगाया। खबर मिलते ही दीपू अपनी टीम के साथ जिला अस्पताल ब्लड बैंक पहुंच गए। उन्होंने तुरंत डॉ. निशांत सक्सेना और डॉ. प्रियंका खरे से रिपोर्ट शेयर कर राय ली। डॉ. प्रियंका ने तुरंत भर्ती कर दो यूनिट A-नेगेटिव ब्लड चढ़ाने को कहा।

पत्नी का डोनर कार्ड दिया, गोसाईगंज से बुलाया डोनर
दीपू ने बिना देर किए जानवी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। अपनी पत्नी शालिनी पाण्डेय का डोनर कार्ड देकर ब्लड बैंक में बची इकलौती A-नेगेटिव यूनिट दिलवाई। दूसरी यूनिट के लिए गोसाईगंज के सत्यम पाण्डेय को बुलाया, जिनका ग्रुप A-नेगेटिव था।

‘ब्लड बैंक खाली, प्रशासन जिम्मेदार’- दीपू
डॉ. आशीष पाण्डेय ‘दीपू’ ने सिस्टम पर सीधा हमला बोला: “दर्शननगर मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में सामान्य ग्रुप का ब्लड तक नहीं है। मरीज तड़प रहे हैं। प्रशासन वृहद रक्तदान शिविर लगवाए, वरना खून की कमी से जानें जाती रहेंगी।”
चलता-फिरता ब्लड बैंक हैं दीपू
अयोध्या में ‘ब्लड मैन’ के नाम से मशहूर डॉ. दीपू के साथ इस मिशन में भूपेंद्र पाण्डेय, गुणाकेश तिवारी, तनुज मल्होत्रा और बृजेश चौहान मौजूद रहे। एक कॉल पर दौड़ पड़ने वाले दीपू अयोध्या के लिए चलते-फिरते ब्लड बैंक बन चुके हैं।





