
- रिपोर्ट: अमित कुमार
अयोध्या का सरकारी अस्पताल! यह वह जगह है जहाँ बीमारों को राहत मिलनी चाहिए, लेकिन आजकल यह ‘अहंकार की नर्सरी’ बन गया है।एक तरफ माननीय मुख्यमंत्री जी प्रदेश में सुशासन की रामधुन बजा रहे हैं, और दूसरी तरफ, इस अस्पताल के कुछ कर्मचारी व्यक्तिगत निरंकुशता का ऐसा अन्न-महोत्सव’ चला रहे हैं कि गरीब माँ के बच्चे को खाना देने से पहले पूछते हैं: ये खाना सरकार नहीं, हम देते हैं जिसे मन करेगा, उसे ही देंगे। गजब है। सरकारी अनाज अब इन ‘महाराज’ की जागीर बन गया है! क्या ये कर्मचारी समझते हैं कि वे टैक्सपेयर्स के पैसे से नहीं, बल्कि अपनी जागीर से अनाज लाकर खिला रहे हैं इनकी हिम्मत तो देखिए सुशासन की नीति को सीधे-सीधे चुनौती दे रहे हैं! यह केवल एक कर्मचारी की गलती नहीं बल्कि सरकारी अन्न के दुरुपयोग का क्रूर प्रदर्शन है।
माननीय जिलाधिकारी (DM) महोदय! हमें पता है कि आपका प्रशासनिक डंडा कितना सीधा और मजबूत है। यह घटना आपके प्रशासन की नेकनामी को दाग लगाने की एक घटिया साजिश है, जिसे इन नवाबों ने रचा है। जनता आपसे नहीं, बल्कि इन छुटभैये कर्मचारियों से त्रस्त है! आपके एक इशारे पर ये मालिक से तुरंत सेवक बन जाएँगे। कृपया, इन्हें इनके पद से विदा कर दें, ताकि आपकी इंसानियत का मीटर फिर से ऑन हो सके।
जनकल्याण के प्रति समर्पित माननीय मुख्यमंत्री जी! यह मामला आपके कल्याणकारी इरादों पर किसी सड़क छाप गुटखे के धब्बे जैसा है, जिसे कुछ अक्षम और क्रूर स्थानीय तत्वों ने जानबूझकर लगाया है। हम जानते हैं कि आपकी नज़र इन ‘अहंकारी कीड़ों’ पर पड़ते ही ये बिल में घुस जाएँगे। जनता आपसे तत्काल, निर्णायक हस्तक्षेप की माँग कर रही है, ताकि यह संदेश जाए कि आपके राज में सरकारी सेवा सिर्फ जनता के लिए है, किसी कर्मचारी के व्यक्तिगत अहंकार की पूर्ति के लिए नहीं।
मासूम के आँसू, इस ड्रामा और क्रूरता को तत्काल खत्म करने की माँग कर रहे हैं।




