
-प्रधानमंत्री के औपचारिक शुभारंभ से पहले रोपवे के भीतर वीडियो बनाने पहुंचा इन्फ्लुएंसर, लेकिन खबर दिखाने वाले पत्रकारों को कवरेज की अनुमति नहीं; प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे तीखे सवाल
- पंकज झा की कलम से✍️
Varanasi: काशी में बहुप्रतीक्षित रोपवे परियोजना को लेकर अब एक नया विवाद खड़ा होता नजर आ रहा है। औपचारिक शुभारंभ से पहले ही एक इन्फ्लुएंसर का रोपवे के अंदर पहुंचकर वीडियो बनाना चर्चा का विषय बन गया है। इस घटनाक्रम ने प्रशासन और संबंधित विभाग की अनुमति व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब रोपवे के भीतर कैमरे के साथ वीडियो बनाने के लिए एक इन्फ्लुएंसर को प्रवेश मिल सकता है, तो फिर पत्रकारों को समाचार कवरेज के लिए अनुमति क्यों नहीं मिल रही है? आखिर ऐसी कौन सी व्यवस्था है, जिसमें प्रचार से जुड़े लोगों के लिए रास्ते खुले हैं और जनहित की खबरें दिखाने वाले पत्रकारों के लिए पाबंदियां हैं?
पत्रकार किसी परियोजना का प्रचार करने नहीं, बल्कि उसकी वास्तविक स्थिति, सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और जनसुविधाओं से जुड़ी जानकारी जनता तक पहुंचाने के लिए मौके पर जाना चाहते हैं। इसके बावजूद उन्हें रोपवे के भीतर की जानकारी जुटाने और कवरेज करने का अवसर नहीं मिलना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
क्या प्रशासन ने इन्फ्लुएंसर के लिए अलग नियम और पत्रकारों के लिए अलग मापदंड बना रखे हैं? यदि सुरक्षा कारणों से प्रवेश प्रतिबंधित है, तो फिर यह प्रतिबंध सभी पर समान रूप से लागू क्यों नहीं दिखाई दे रहा? इन्फ्लुएंसर को किसकी अनुमति से प्रवेश मिला और पत्रकारों को किस आधार पर रोका जा रहा है?
यह मामला किसी एक इन्फ्लुएंसर या पत्रकार तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और सूचना के समान अवसर से जुड़ा है। यदि रोपवे परियोजना जनता के लिए तैयार की जा रही है, तो उससे जुड़ी सही और निष्पक्ष जानकारी जनता तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
अब जरूरत है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग स्पष्ट करें कि रोपवे के भीतर वीडियो बनाने की अनुमति किसे, किस आधार पर और किसकी संस्तुति पर दी गई? साथ ही पत्रकारों को कवरेज से वंचित रखने के पीछे क्या कारण हैं?
काशी की जनता जवाब चाहती है और पत्रकार अपने अधिकारों के तहत कवरेज का अवसर। आखिर रोपवे में प्रवेश का रास्ता इन्फ्लुएंसर के लिए खुला है तो पत्रकारों के लिए बंद क्यों? क्या यहां भी खबर से ज्यादा प्रचार को प्राथमिकता दी जा रही है?




