
- पंकज झा की कलम से ✍️
Varanasi. मरीज की हालत कब बिगड़ जाए, यह किसी को पता नहीं होता। यही वजह है कि अस्पताल की इमरजेंसी सेवा में हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन श्री शिव प्रसाद गुप्ता मंडलीय जिला चिकित्सालय (एसएसपीजी हॉस्पिटल) की इमरजेंसी सेवा में पंजीकरण व्यवस्था को लेकर सामने आई तस्वीरें और शिकायतें अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
बताया जा रहा है कि इमरजेंसी सेवा के पंजीकरण काउंटर पर मरीजों और तीमारदारों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा, जबकि पंजीकरण काउंटर कई घंटे तक खाली पड़ा रहा। ऐसे में इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ती रही।
इमरजेंसी में आने वाला मरीज सामान्य मरीज नहीं होता। कई बार वह दर्द, दुर्घटना, गंभीर बीमारी या अचानक बिगड़ी तबीयत के कारण अस्पताल पहुंचता है। ऐसे समय में यदि पंजीकरण जैसी शुरुआती प्रक्रिया के लिए ही लंबा इंतजार करना पड़े तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि इमरजेंसी व्यवस्था आखिर किसके भरोसे चल रही है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पंजीकरण काउंटर पर कर्मचारी की ड्यूटी निर्धारित है तो काउंटर घंटों खाली क्यों रहा? क्या संबंधित अधिकारियों की ओर से नियमित निगरानी नहीं की जा रही थी? क्या इमरजेंसी जैसी संवेदनशील सेवा में कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है?
मरीज और तीमारदार अस्पताल से उम्मीद लेकर आते हैं कि उन्हें समय पर चिकित्सकीय सहायता मिलेगी। लेकिन यदि इमरजेंसी के प्रवेश द्वार पर ही पंजीकरण के लिए उन्हें घंटों इंतजार करना पड़े, तो यह स्थिति अस्पताल प्रशासन के लिए गंभीरता से देखने का विषय बन जाती है।
यह मामला केवल एक पंजीकरण काउंटर का नहीं है। इमरजेंसी सेवा की विश्वसनीयता इस बात से तय होती है कि संकट की घड़ी में मरीज को कितनी तेजी से और कितनी सहजता से चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होती है। पंजीकरण जैसी बुनियादी व्यवस्था में भी यदि लंबे समय तक व्यवधान की स्थिति बनती है, तो उसकी जवाबदेही तय होना जरूरी है।
अस्पताल प्रशासन को चाहिए कि पूरे मामले की तत्काल जांच कर यह स्पष्ट करे कि संबंधित समयावधि में पंजीकरण काउंटर पर कर्मचारी की ड्यूटी किसकी थी, काउंटर खाली रहने की वास्तविक वजह क्या थी और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए क्या व्यवस्था की जा रही है।
सरकारी अस्पताल गरीब और आम मरीजों के लिए सबसे बड़ी उम्मीद होते हैं। इसलिए वहां की इमरजेंसी सेवा में किसी भी स्तर की लापरवाही या अव्यवस्था की शिकायत को सामान्य घटना मानकर टालना उचित नहीं होगा।
मरीज को इलाज चाहिए, इंतजार नहीं।
इमरजेंसी में हर मिनट की कीमत होती है—ऐसे में सवाल यह है कि जब मरीज इमरजेंसी के दरवाजे पर पहुंच जाए, तो क्या उसे इलाज की कतार मिलेगी या खाली पड़ा पंजीकरण काउंटर?




