
- वाराणसी मंडल ब्यूरो पंकज झा
वाराणसी। देश की राजधानी दिल्ली में जब किसी बड़ी इमारत के ढहने या गंभीर अव्यवस्था की घटना सामने आती है तो प्रशासनिक तंत्र की सक्रियता, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही और व्यवस्था की निगरानी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। लेकिन विश्वविख्यात धार्मिक नगरी काशी में भीड़भाड़ वाले प्रमुख क्षेत्रों में सामने आ रही अतिक्रमण और यातायात संबंधी शिकायतें अब एक अलग सवाल खड़ा कर रही हैं—क्या व्यवस्था की निगाहें उन स्थानों तक पहुंच रही हैं, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु और स्थानीय लोग आवागमन करते हैं?
गोदौलिया चौराहा, दशाश्वमेध क्षेत्र और आसपास के प्रमुख मार्ग काशी की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन्हीं रास्तों से होकर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु धार्मिक स्थलों तक पहुंचते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में कथित बढ़ते अतिक्रमण, बेतरतीब वाहन खड़े होने और यातायात प्रभावित होने की शिकायतें व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं।
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की ओर से समय-समय पर यह शिकायत सामने आती रही है कि कुछ स्थानों पर सार्वजनिक मार्गों और सड़क किनारे ऐसी गतिविधियां दिखाई देती हैं, जिनसे आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होती है। सवाल सीधा है—यदि अतिक्रमण लगातार बढ़ रहा है तो उसकी नियमित निगरानी कौन कर रहा है? यदि कार्रवाई होती है तो वही स्थिति दोबारा क्यों दिखाई देती है?
इसी के साथ सबसे अहम सवाल दोपहिया वाहनों से कथित मनमानी वसूली को लेकर भी उठ रहा है। काशी विश्वनाथ और काल भैरव मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं एवं वाहन चालकों के बीच ऐसी शिकायतें चर्चा में हैं कि कुछ स्थानों पर वाहन खड़ा करने या पार्किंग के नाम पर निर्धारित शुल्क से अलग रकम मांगे जाने की बात सामने आती है।
यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि किसी व्यक्ति, संस्था या पार्किंग संचालक पर अवैध वसूली का आरोप बिना जांच के तथ्य के रूप में नहीं लगाया जा सकता। लेकिन यदि वाहन चालकों की ओर से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आती हैं तो यह निश्चित रूप से प्रशासन के लिए जांच का विषय है।
प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कहां अधिकृत पार्किंग है, निर्धारित शुल्क कितना है, शुल्क लेने का अधिकार किसके पास है और वाहन चालक को रसीद मिलनी चाहिए या नहीं। यदि निर्धारित शुल्क से अधिक रकम वसूली जाती है अथवा बिना अधिकार के वसूली की जाती है तो जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
काशी विश्वनाथ और काल भैरव जैसे धार्मिक स्थलों पर आने वाला श्रद्धालु दर्शन और आस्था के लिए आता है। यदि मंदिर क्षेत्र तक पहुंचने के दौरान उसे पार्किंग, यातायात और अतिक्रमण से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़े तो इससे काशी की व्यवस्था और उसकी छवि दोनों प्रभावित होती हैं।
गोदौलिया और दशाश्वमेध जैसे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था का महत्व और भी बढ़ जाता है। यहां सड़क किनारे अनधिकृत कब्जे, अव्यवस्थित पार्किंग अथवा रास्ते में बाधा बनने वाली गतिविधियों की शिकायतें यदि सही हैं तो उनका असर केवल वाहन चालकों पर नहीं, बल्कि पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं, बुजुर्गों, महिलाओं और आपातकालीन सेवाओं तक पर पड़ सकता है।
काशी कोई सामान्य शहर नहीं है। यह देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए प्रसिद्ध है। काशी विश्वनाथ धाम और काल भैरव मंदिर तक पहुंचने वाले मार्गों की व्यवस्था भी उसी पहचान का हिस्सा है। इसलिए यहां की सड़क व्यवस्था केवल स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि काशी आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा और शहर की प्रतिष्ठा से जुड़ा विषय है।
सवाल किसी अधिकारी या व्यक्ति विशेष को कठघरे में खड़ा करने का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था और निगरानी तंत्र से है, जिसकी जिम्मेदारी सार्वजनिक मार्गों को अतिक्रमण से मुक्त रखने, यातायात सुचारु कराने और अधिकृत शुल्क व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने की है।
यदि कहीं निर्धारित शुल्क लागू है तो उसकी जानकारी स्पष्ट रूप से सार्वजनिक होनी चाहिए। यदि कहीं अनधिकृत वसूली की शिकायत है तो उसकी जांच होनी चाहिए। यदि अतिक्रमण है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। और यदि किसी स्तर पर पहले से कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, तो यह भी देखा जाना चाहिए कि उनका वास्तविक धरातल पर कितना पालन हो रहा है।
काशी को विश्वस्तरीय बनाने की बात केवल योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित नहीं रह सकती। उसकी सड़कों पर भी व्यवस्था दिखाई देनी चाहिए।
गोदौलिया से दशाश्वमेध तक उठ रहे सवालों का जवाब आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि पारदर्शी जांच, स्पष्ट शुल्क व्यवस्था, नियमित निगरानी और प्रभावी कार्रवाई से मिल सकता है।
अब जरूरत है कि संबंधित विभाग मौके पर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करें, अधिकृत पार्किंग और शुल्क की जानकारी सार्वजनिक करें, अतिक्रमण की शिकायतों की जांच करें और यदि मनमानी वसूली की शिकायतें जांच में सही पाई जाती हैं तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें।
क्योंकि सवाल केवल कुछ रुपयों का नहीं है।
सवाल काशी आने वाले श्रद्धालु के सम्मान, सुविधा और सुरक्षित आवागमन का है।
और आखिरकार सबसे बड़ा सवाल यही है—
काशी की सड़कों पर व्यवस्था देखने वाली निगाहें आखिर कब खुलेंगी?




