
- वाराणसी मंडल ब्यूरो पंकज झा
Varanasi: गैंगस्टर एक्ट के एक मामले में अदालत ने तीन आरोपितों को बड़ी राहत देते हुए दोषमुक्त कर दिया। विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) सुशील कुमार खरवार की अदालत ने नारायणपुर, लंका निवासी मुन्नू तिवारी, त्रिपुरा भैरवी, दशाश्वमेध निवासी महेश पुरोहित तथा हड़हा सराय चौक निवासी सानू उर्फ नाजिम को आरोप सिद्ध न होने और संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
अदालत में आरोपित मुन्नू तिवारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा। वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने अदालत के समक्ष अभियोजन की कहानी और साक्ष्यों में मौजूद महत्वपूर्ण कमियों को मजबूती से प्रस्तुत करते हुए यह दलील रखी कि गैंगचार्ट में महज दो मुकदमों का उल्लेख किया गया है और संबंधित मामलों में आरोपित पहले ही दोषमुक्त हो चुके हैं। इसके अलावा आरोपितों के खिलाफ ऐसा कोई ठोस साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके आधार पर गैंगस्टर एक्ट के तहत अपराध सिद्ध माना जा सके।
अभियोजन के अनुसार, आठ फरवरी 2008 को तत्कालीन लक्सा थाना प्रभारी अशोक कुमार सिंह पुलिसकर्मियों के साथ क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें सूचना मिली कि पार्षद विजय वर्मा की हत्या के मामले में आरोपित संतोष गुप्ता उर्फ कित्तुल, लालू वर्मा, सुरेंद्र पांडेय, सानू उर्फ नाजिम, महेश पुरोहित और मुन्नू तिवारी शातिर अपराधी हैं और उन्होंने अपना गिरोह बना रखा है। अभियोजन का आरोप था कि गिरोह के सदस्य हत्या, हत्या के प्रयास, लूट समेत विभिन्न आपराधिक घटनाओं को अंजाम देकर अपने तथा गिरोह के सदस्यों के आर्थिक एवं भौतिक लाभ के लिए काम करते थे। इनके खिलाफ वाराणसी, भदोही, चंदौली सहित विभिन्न जनपदों में आपराधिक मुकदमे दर्ज होने का भी दावा किया गया था। इसके बाद जिलाधिकारी की संस्तुति पर लक्सा थाने में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
मामले के विचारण के दौरान बचाव पक्ष ने अभियोजन के साक्ष्यों पर गंभीर सवाल उठाए। वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव की ओर से की गई प्रभावी पैरवी में इस तथ्य पर विशेष जोर दिया गया कि गैंगचार्ट में जिन मुकदमों का आधार लिया गया, उनमें आरोपित पहले ही दोषमुक्त हो चुके हैं। साथ ही अभियोजन आरोपों को पुष्ट करने वाला ठोस एवं विश्वसनीय साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर सका।
पत्रावली के अवलोकन और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने माना कि अभियोजन आरोपितों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने में असफल रहा। इसके बाद अदालत ने मुन्नू तिवारी, महेश पुरोहित और सानू उर्फ नाजिम को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव की तथ्यपरक, सटीक और प्रभावी कानूनी पैरवी को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने अभियोजन के साक्ष्यों में मौजूद कमजोर कड़ियों को अदालत के समक्ष मजबूती से रखा, जिसका परिणाम तीन आरोपितों को मिली बड़ी कानूनी राहत के रूप में सामने आया।





