
- वाराणसी मंडल ब्यूरो
Varanasi. काशी की धरती पर भक्ति, आस्था और सेवा की परंपरा सदियों पुरानी है, लेकिन कुछ लोग अपने समर्पण और सेवाभाव से इस परंपरा को नई ऊंचाई देते हैं। ऐसे ही सेवाभावी व्यक्तित्व हैं लक्ष्मीकांत मिश्रा उर्फ ‘किशमिश गुरु’, जिन्होंने अपने परिवार के साथ बाबा विश्वनाथ के भक्तों की सेवा को जीवन का संकल्प बना लिया है। सावन के चौथे सोमवार को बाँशफाटक में उनकी 25 वर्षों पुरानी सेवा परंपरा का भव्य और भावपूर्ण स्वरूप देखने को मिला, जहां करीब 2000 कुंतल दही से तैयार ठंडी-मीठी लस्सी लाखों कांवरियों और श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप वितरित की गई।
हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजते बाँशफाटक में जब कांवड़ लेकर दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं को ठंडी लस्सी का प्रसाद मिला, तो उनके चेहरों पर थकान के बीच राहत और प्रसन्नता साफ नजर आई। लस्सी का प्रत्येक गिलास मानो काशी की उस परंपरा का संदेश दे रहा था, जिसमें अतिथि सत्कार, सेवा, श्रद्धा और मानवता एक साथ दिखाई देती है।
लक्ष्मीकांत मिश्रा ‘किशमिश गुरु’ और उनके परिवार की यह सेवा कोई एक दिन या एक वर्ष की पहल नहीं है। इसकी नींव वर्ष 2002 में बाँशफाटक पर एक छोटे से भंडारे के रूप में रखी गई थी। उस समय शुरू हुई छोटी-सी सेवा धीरे-धीरे एक विशाल सेवा अभियान में बदलती चली गई। देखते ही देखते यह परंपरा 25 वर्षों के लंबे सफर तक पहुंच गई और आज सावन में लाखों श्रद्धालुओं की सेवा का माध्यम बन चुकी है।
परिवार ने इस वर्ष भी उसी श्रद्धा, उत्साह और समर्पण के साथ बाबा विश्वनाथ के भक्तों की सेवा की। खास बात यह रही कि इतने वर्षों के बाद भी सेवा का मूल भाव बिल्कुल वही है—बिना किसी स्वार्थ के श्रद्धालुओं की सेवा और बाबा के भक्तों का सत्कार।
‘किशमिश गुरु’ की सेवा परंपरा की सबसे प्रेरक बात यह है कि सावन में दिखाई देने वाला यह भव्य आयोजन वास्तव में पूरे वर्ष की साधना का परिणाम होता है। परिवार के सदस्य सालभर अपनी पांच अलग-अलग गुल्लकों में बचत जमा करते हैं। सावन आने पर इन्हीं गुल्लकों में जमा धनराशि का उपयोग कांवरियों और श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद एवं सेवा की व्यवस्था में किया जाता है।
अर्थात भंडारा केवल सावन में नहीं लगता, बल्कि उसकी तैयारी पूरे साल चलती रहती है। यही सोच इस सेवा को केवल धार्मिक आयोजन न बनाकर परिवार की सामूहिक आस्था और संस्कारों की जीवंत मिसाल बना देती है।
इस पुनीत सेवा कार्य में लक्ष्मीकांत मिश्रा उर्फ ‘किशमिश गुरु’, उनकी पत्नी सुनीता मिश्रा, बड़े बेटे आदित्य मिश्रा, बेटी अदिति मिश्रा और छोटे बेटे आदेश मिश्रा सहित पूरा परिवार पूरी निष्ठा से जुटा रहता है। सेवा में संजय मिश्रा बाबा सहित परिवार और सहयोगियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
परिवार का स्पष्ट मानना है कि बाबा विश्वनाथ के भक्तों की सेवा करना ही बाबा की सच्ची सेवा है। इसी भावना के साथ परिवार वर्षों से सावन में काशी आने वाले कांवरियों और श्रद्धालुओं के लिए सेवा का यह सिलसिला निरंतर आगे बढ़ा रहा है।
लंबी कांवड़ यात्रा पूरी करके काशी पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए गर्मी और थकान के बीच ठंडी लस्सी का प्रसाद किसी राहत से कम नहीं था। सेवा स्थल पर श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच लगातार लस्सी वितरण होता रहा। ठंडी-मीठी लस्सी का स्वाद लेते हुए श्रद्धालुओं ने सेवा कार्य की सराहना की और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
इस पूरे दृश्य में काशी की वह आत्मा दिखाई दी, जहां धार्मिक आस्था केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सेवा और परोपकार के रूप में सड़कों पर भी दिखाई देती है।
लक्ष्मीकांत मिश्रा ‘किशमिश गुरु’ की 25 वर्षों की यह सेवा यात्रा इस बात का उदाहरण है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो छोटी-सी शुरुआत भी कालांतर में बड़े जनसेवा अभियान का रूप ले सकती है। पांच गुल्लकों में पूरे वर्ष बचत जमा करने से लेकर सावन में हजारों-लाखों श्रद्धालुओं तक प्रसाद पहुंचाने तक, इस सेवा में परिवार, संस्कार, आस्था और समर्पण का अद्भुत मेल देखने को मिलता है।
काशी की गलियों में गूंजते हर-हर महादेव के जयघोष के बीच ‘किशमिश गुरु’ और उनके परिवार की यह सेवा परंपरा श्रद्धालुओं के लिए केवल लस्सी का प्रसाद नहीं, बल्कि अपनत्व, सम्मान और निस्वार्थ सेवा का प्रसाद बन गई है।
इस अवसर पर मेयर अशोक तिवारी, TV9 डायरेक्टर हेमंत शर्मा, लक्ष्मीकांत मिश्रा उर्फ ‘किशमिश गुरु’, मनोज राय, पूर्व मंत्री राजकुमार शुक्ला, कार्तिक पांडे, गोपाल यादव, सत्येंद्र दुबे, ज्ञानू यादव, राहुल यादव, नीतू श्रीवास्तव, वरुण सिंह पार्षद, विजय यादव बीजू, मनोज सिंह, विजय कपूर, अनूप मालवीय, अमिताभ दीक्षित, बबलू तिवारी, कमल तिवारी, अजय तिवारी, रमाकांत, गणेश गुप्ता, शुभम यादव, टीपू शर्मा, बबलू यादव, मंटू गुप्ता, महेश पुरोहित, बीपी साहू, रवि जैन, मुन्नू-श्यामू यादव, सुमित मल्होत्रा, वासुदेव सिंह, खुर्शीद भाई, सोनालाल सेठ, आशीष साहू, शैलेंद्र दुबे, आकाश जी, प्रमोद राय, राजू यादव, प्रकाश तिवारी, अभय पाठक, विकास यादव बच्चा, आदित्य मिश्रा, आदेश मिश्रा और संजय मिश्रा बाबा सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।




