
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में अंशदान जमा करने में देरी पर सख्त नियम लागू किए हैं। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग (DoE) ने सभी मंत्रालयों और सरकारी विभागों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि कर्मचारियों के वेतन से कटने वाला एनपीएस अंशदान निर्धारित समय-सीमा के भीतर पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) के पास जमा कराना अनिवार्य होगा। देरी होने पर कर्मचारियों को ब्याज का लाभ दिया जाएगा।
देरी पर मिलेगा PPF के बराबर ब्याज
13 जुलाई 2026 को जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी का एनपीएस अंशदान तय समय के बाद जमा होता है, तो देरी की अवधि का ब्याज भी उसके खाते में जोड़ा जाएगा। यह ब्याज उस समय लागू पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) की ब्याज दर के बराबर होगा, जो वर्तमान में 7.1 प्रतिशत वार्षिक है। इससे कर्मचारियों को विभागीय लापरवाही के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान से राहत मिलेगी।
दोषी अधिकारियों पर होगी सख्त कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एनपीएस अंशदान जमा करने में प्रशासनिक लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। विभागाध्यक्ष (HOD) या मुख्य लेखा नियंत्रक मामले की जांच करेंगे। यदि किसी अधिकारी की गलती सामने आती है, तो कर्मचारी को दिए गए ब्याज की राशि संबंधित अधिकारी के वेतन से वसूल की जाएगी। इसके साथ ही उसके खिलाफ विभागीय एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
TDS नियमों की तर्ज पर तय होगी जिम्मेदारी
वित्त मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 201(1A) के तहत टीडीएस जमा करने में देरी से जुड़े प्रावधानों की तर्ज पर होगी। सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि ऐसे मामलों में अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट 31 जुलाई 2026 तक उपलब्ध कराई जाए और भविष्य में किसी भी प्रकार की देरी न हो, यह सुनिश्चित किया जाए।
रिटायरमेंट फंड की सुरक्षा के लिए अहम फैसला
एनपीएस एक दीर्घकालिक रिटायरमेंट बचत योजना है, जिसमें जमा राशि का निवेश विभिन्न वित्तीय साधनों में किया जाता है। अंशदान समय पर जमा न होने से कर्मचारियों को निवेश पर मिलने वाले संभावित रिटर्न और कंपाउंडिंग का लाभ नहीं मिल पाता। सरकार का यह नया फैसला कर्मचारियों के रिटायरमेंट फंड की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ सरकारी विभागों में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




