
नई दिल्ली: समुद्री संघर्ष वाले इलाकों में बढ़ते खतरे के बीच भारत सरकार ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। हाल ही में एक अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग (डीजी शिपिंग) ने सभी समुद्री भर्ती एजेंसियों को अगले आदेश तक संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में नई तैनाती रोकने के निर्देश दिए हैं।
बताया जा रहा है कि ईरान युद्ध शुरू होने के समय इस क्षेत्र में करीब 23 हजार भारतीय नाविक तैनात थे, जबकि बड़ी संख्या में नाविक अभी भी फारस की खाड़ी में विभिन्न जहाजों पर मौजूद हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी के लिए विशेष एडवाइजरी
सरकार की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी से गुजरने वाले जहाजों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।
मौजूदा हालात को देखते हुए समुद्र में आवश्यकता पड़ने पर क्रू बदलने की अनुमति भी दी गई है, लेकिन इसके लिए संबंधित नाविक की सहमति अनिवार्य होगी। बिना सहमति के किसी नाविक को जोखिम वाले क्षेत्र में नहीं भेजा जाएगा।
अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत
रिपोर्ट के अनुसार, 8, 10 और 11 जून को अमेरिकी नौसेना ने मारिवेक्स, सेटेबेलो और जलवीर नामक व्यापारिक जहाजों पर कार्रवाई की। इनमें से सेटेबेलो जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई, जिनमें एक चीफ इंजीनियर, एक इंजन फिटर और एक डेक कैडेट शामिल थे।
अमेरिका का आरोप है कि संबंधित जहाज ईरानी तेल प्रतिबंधों के उल्लंघन से जुड़े थे और निर्देशों का पालन नहीं कर रहे थे।
शिपिंग कंपनी ने आरोपों को बताया गलत
सेटेबेलो जहाज का संचालन करने वाली कंपनी ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कहा कि जहाज कई दिनों से एक ही स्थान पर खड़ा था और उसे कोई चेतावनी नहीं दी गई थी। कंपनी का यह भी कहना है कि जहाज का ईरानी तेल या किसी प्रतिबंधित बंदरगाह से कोई संबंध नहीं था।
भारत ने अमेरिका के सामने दर्ज कराया विरोध
इस घटना के बाद भारत ने कूटनीतिक स्तर पर अमेरिका के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है। एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत के दौरान निर्दोष व्यापारिक जहाजों पर इस तरह के हमलों पर गंभीर आपत्ति जताई।
नोट: इस मामले से जुड़े कई दावे अलग-अलग पक्षों की ओर से किए गए हैं। अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक जांच और संबंधित एजेंसियों की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगा।




