
लखनऊ। समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने बुधवार को भाजपा पर अप्रत्यक्ष तरीके से आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया का जिक्र करते हुए भर्ती में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और आरक्षण नियमों के उल्लंघन का दावा किया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि दलित और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक अधिकारों को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 69 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का 23.14 प्रतिशत तक उल्लंघन हुआ। यादव के मुताबिक दलित उम्मीदवारों को जहां 21 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए था, वहीं उन्हें केवल 16.2 प्रतिशत आरक्षण ही दिया गया।
उन्होंने कहा कि इस भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ और हजारों सीटों पर अनियमितता हुई। यादव ने National Commission for Backward Classes की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि इस मामले से करीब 20 हजार सीटें प्रभावित हुईं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने भी आरक्षण में गड़बड़ी की बात स्वीकार की थी।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सीधे तौर पर आरक्षण खत्म नहीं कर सकती, इसलिए वह अप्रत्यक्ष तरीकों का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि “योग्य नहीं पाया गया” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर पिछड़े और दलित वर्ग के उम्मीदवारों को नौकरियों से वंचित किया जा रहा है।
सपा प्रमुख ने कहा कि डॉ. B. R. Ambedkar द्वारा लागू की गई आरक्षण व्यवस्था 2014 तक सुचारू रूप से चलती रही, लेकिन उसके बाद इसे कमजोर करने की कोशिशें तेज हो गईं। उन्होंने भाजपा पर वंचित समुदायों को पीछे रखने और सामाजिक असमानता बढ़ाने का आरोप लगाया।
बुलडोजर कार्रवाई पर भी तंज कसते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि अगर सरकार बुलडोजर का इस्तेमाल करना चाहती है तो उसे असमानता और भेदभाव खत्म करने के लिए करना चाहिए, ताकि हर व्यक्ति को उसका अधिकार मिल सके।
उन्होंने कहा कि आरक्षण कोई दान नहीं बल्कि संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है और सामाजिक समानता कायम करने के लिए इसे मजबूत करना जरूरी है।




