
- रिपोर्ट: स्निग्धा श्रीवास्तव
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए स्मार्ट मीटर को प्रीपेड से वापस पोस्टपेड सिस्टम में बदलने का फैसला किया है। इस फैसले को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी मिली है, जबकि ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा ने इसकी जानकारी दी। अब उपभोक्ता पहले बिजली का उपयोग कर सकेंगे और बाद में बिल का भुगतान कर पाएंगे।
नई व्यवस्था के तहत पूरे महीने की बिजली खपत का हिसाब रखा जाएगा और अगले महीने की 10 तारीख तक बिल जारी होगा। उपभोक्ताओं को बिल जमा करने के लिए 15 दिन का समय मिलेगा। सबसे बड़ी राहत यह है कि भुगतान में थोड़ी देरी होने पर तुरंत बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा।
प्रीपेड सिस्टम से क्यों लिया गया यू-टर्न?
प्रीपेड स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। रिचार्ज के बावजूद बिजली कटना, बैलेंस अपडेट में देरी, तकनीकी गड़बड़ियां और सीमित बजट वाले परिवारों के लिए कठिनाई जैसे मुद्दों ने सरकार को यह फैसला लेने पर मजबूर किया। कई मामलों में रिचार्ज के बाद भी घंटों तक बिजली बहाल नहीं हो पाई, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ी।
इसके अलावा सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के नए दिशा-निर्देशों में भी उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड के बीच विकल्प देने की बात कही गई है, जिसके बाद राज्य ने यह बदलाव लागू किया।
किसे होगा फायदा?
प्रदेश में अब तक करीब 75 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इस फैसले के बाद:
- उपभोक्ता पोस्टपेड बिलिंग का विकल्प चुन सकेंगे
- नए कनेक्शन में प्रीपेड अनिवार्य नहीं होगा
- बिना सहमति के बिलिंग सिस्टम लागू नहीं किया जा सकेगा
इससे उपभोक्ताओं को रोजाना बैलेंस चेक करने की चिंता से राहत मिलेगी और अचानक बिजली कटने की समस्या भी कम होगी।
सरकार ने शुरू की अतिरिक्त सुविधाएं
बिजली सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए सरकार कई नई सुविधाएं भी शुरू कर रही है:
- SMS और WhatsApp के जरिए बिल और अलर्ट
- 1912 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने की सुविधा
- स्थानीय स्तर पर समस्या समाधान कैंप
- पुराने बकाया बिल को 10 किस्तों में चुकाने का विकल्प
- ट्रांसफॉर्मर बदलने और सप्लाई सुधार के निर्देश
प्रीपेड बनाम पोस्टपेड: क्या है अंतर?
- प्रीपेड: पहले रिचार्ज, फिर बिजली उपयोग, बैलेंस खत्म होते ही सप्लाई बंद
- पोस्टपेड: पहले उपयोग, बाद में बिल, तय समय में भुगतान
सरकार का यह फैसला उपभोक्ताओं को अधिक लचीलापन देने और बिजली सेवाओं को सरल बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अब लोग बिना अचानक कटौती की चिंता के अपने खर्चों की बेहतर योजना बना सकेंगे।





