- रिपोर्ट: पंकज झा
वाराणसी। प्रयागराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि मजिस्ट्रेट ने आरोपपत्र (चार्जशीट) पर संज्ञान ले लिया हो और उसके बाद पुलिस आगे की जांच में फाइनल रिपोर्ट (क्लोजर रिपोर्ट) दाखिल कर दे, तो अदालत उस रिपोर्ट की अनदेखी नहीं कर सकती. उसे प्रारंभिक रिपोर्ट और अंतिम रिपोर्ट, दोनों को साथ पढ़कर स्वतंत्र रूप से आदेश पारित करना होगा.
SC/ST एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज हुई: यह आदेश न्यायमूर्ति अनिल कुमार-दशम ने सोनू की आपराधिक अपील पर दिया. अपीलकर्ता सोनू उर्फ भगवान भक्त सहित छह अन्य ने विशेष न्यायाधीश, एससी/एसटी एक्ट, कन्नौज द्वारा पारित आदेशों को चुनौती दी थी. याचियों के खाने खिलाफ थाना कोतवाली कन्नौज में वर्ष 2023 में आईपीसी की धाराओं 147, 452, 323, 504, 506 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज हुई.
पुलिस ने 15 सितंबर 2023 को चार्जशीट दाखिल की: पुलिस ने 15 सितंबर 2023 को आरोपपत्र दाखिल किया, जिस पर अदालत ने 21 दिसंबर 2023 को संज्ञान ले लिया. इसके बाद आगे की जांच के दौरान 31 मार्च 2024 को जांच अधिकारी ने पूरक रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा कि आरोप असत्य पाए गए हैं अर्थात ‘फाइनल रिपोर्ट’ प्रस्तुत की गई. अपीलकर्ताओं का तर्क था कि ट्रायल कोर्ट ने 7 अगस्त 2025 को आरोप तय करते समय इस फाइनल रिपोर्ट पर कोई विचार नहीं किया, जो कि कानूनन आवश्यक था.
फाइनल रिपोर्ट पर आदेश पारित करनाअनिवार्य: हाईकोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(8) के तहत आगे की जांच और पूरक रिपोर्ट उसी मामले का हिस्सा होती है. अदालत को प्रारंभिक रिपोर्ट और पूरक/फाइनल रिपोर्ट दोनों का संयुक्त रूप से मूल्यांकन करना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि संज्ञान लेने के बाद यदि विपरीत निष्कर्ष वाली फाइनल रिपोर्ट आती है, तो मजिस्ट्रेट के लिए उस पर आदेश पारित करना अनिवार्य है.
मामला अंतिम रूप से निस्तारित नहीं हुआ: ऐसा करना ‘रिव्यू’ नहीं माना जाएगा, क्योंकि मामला अभी अंतिम रूप से निस्तारित नहीं हुआ है. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलो का हवाला देकर कहा पूरक रिपोर्ट मूल रिपोर्ट का अभिन्न हिस्सा है और दोनों को साथ पढ़ना आवश्यक है. कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट के पास तीन विकल्प होते हैं. पहला फाइनल रिपोर्ट स्वीकार कर कार्यवाही समाप्त करना दूसरा आरोप तय कर मुकदमा चलाना और तीसरा आगे की जांच का आदेश देना.
मामले को पुनः ट्रायल कोर्ट को भेजा: हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के 10 मई 2024, 27 जून 2024 और 21 अगस्त 2024 के आदेशों सहित आरोप तय करने के आदेश को रद्द कर दिया. मामले को पुनः ट्रायल कोर्ट को भेजते हुए निर्देश दिया गया कि वह पहले प्रारंभिक आरोपपत्र और फाइनल रिपोर्ट दोनों पर विचार कर विधि अनुसार आदेश पारित करे. कोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया है कि यह आदेश प्रदेश के सभी जिला न्यायालयों को भेजा जाए, ताकि भविष्य में ऐसी प्रक्रियात्मक त्रुटि न हो.





