
- रिपोर्ट: स्निग्धा श्रीवास्तव
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने राम मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारकों के महत्व से श्रद्धालुओं को अवगत कराने के उद्देश्य से हिंदी और अंग्रेजी में शिलालेख स्थापित किए हैं। इन शिलालेखों के माध्यम से रामायण काल से जुड़े विभिन्न स्थलों और पात्रों की जानकारी आगंतुकों को दी जा रही है।
परिसर के अंगद टीला में एक परिचयात्मक शिलालेख लगाया गया है, जबकि टीले के ऊपर स्थापित गिलहरी की प्रतिमा के पास “पवित्र गिलहरी” शीर्षक से अलग शिलालेख लगाया गया है, जिसमें उसकी भूमिका और धार्मिक महत्व का वर्णन किया गया है। श्री राम जन्मभूमि के मीडिया समन्वयक शरद शर्मा ने बताया कि रामायण काल से जुड़े परिसर के सभी प्रमुख स्थलों को या तो मूर्तियों के माध्यम से या ऐतिहासिक स्थलों के रूप में चिन्हित किया गया है।
शरद शर्मा ने बताया कि मंदिर परिसर में बने द्वारों का नामकरण प्रमुख हिंदू संतों के नाम पर किया गया है। उन्होंने कहा, “लंका विजय के दौरान भगवान श्रीराम द्वारा सेतु निर्माण में गिलहरी की भूमिका को दर्शाया गया है। इसी तरह जटायु पर्वत है, जहां महाराजा जटायु की प्रतिमा स्थापित की गई है, जो उनके त्याग और बलिदान का प्रतीक है। इन सभी का उद्देश्य दर्शनार्थियों को रामायण में वर्णित पात्रों, उनके नाम और उनके ऐतिहासिक महत्व से परिचित कराना है।” उन्होंने यह भी बताया कि जगद्गुरु शंकराचार्य और जगद्गुरु रामानंदाचार्य सहित अन्य प्रमुख संतों के नाम पर बने सभी द्वारों का नामकरण किया गया है।
इसके अलावा शरद शर्मा ने पंचवटी के विकास की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि श्रद्धालु मंदिर परिसर को एक पवित्र और शांत पूजा स्थल के रूप में अनुभव कर सकें। उन्होंने कहा कि पंचवटी का निर्माण इस तरह किया जा रहा है कि लोग इसे पूजा स्थल और आध्यात्मिक वातावरण से जुड़ा स्थान मान सकें, जहां शांति और सौंदर्य दोनों का अनुभव हो। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य की लगातार निगरानी की जा रही है।
वहीं अयोध्या के संत सीताराम दास जी महाराज ने कहा कि मंदिर परिसर में लगाए जा रहे नामपट्ट और शिलालेख श्रद्धालुओं को सनातन संस्कृति और भगवान श्रीराम की कथा से जुड़े विभिन्न पात्रों और उनके योगदान को समझने में मदद करेंगे।





