
- रिपोर्ट: पंकज झा
वाराणसी। आईसीएआर-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी में “आईपीआर पोर्टफोलियो को सुदृढ़ करना विषय पर एक दिवसीय बौद्धिक संपदा जागरूकता कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जोनल टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट यूनिट (जेडटीएमयू),आईसीएआर-आईआईवीआर द्वारा आयोजित किया गया और काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, उत्तर प्रदेश द्वारा प्रायोजित किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को बौद्धिक संपदा अधिकार, प्रौद्योगिकी व्यवसायीकरण और कृषि अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र में उभरती चुनौतियों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में 400 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। डॉ. राजेश कुमार, निदेशक,आईसीएआर-आईआईवीआर ने उद्घाटन संबोधन में बौद्धिक संपदा के बढ़ते महत्व पर बल दिया और शोधकर्ताओं को सशक्त और सतत आईपीआर पोर्टफोलियो विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने बताया कि आईसीएआर-आईआईवीआर ने 24 प्रौद्योगिकियों में 47 लाइसेंस प्रदान किए हैं, जिससे ₹ 80 लाख से अधिक का राजस्व अर्जित हुआ है। कार्यक्रम में डॉ. शिव दत्त, प्रधान वैज्ञानिक, आईपी एवं टीएम यूनिट, आईसीएआर, नई दिल्ली ने “कृषि में आईपीआर परिदृश्य” पर व्याख्यान दिया। प्रो. गीता राय, मानव एवं आणविक आनुवंशिकी विभाग, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ने “प्रक्रिया नवाचार से बाजार शक्ति तक : सब्जी अनुसंधान को उच्च-मूल्य आईपी परिसंपत्तियों में रूपांतरण” पर ऑनलाइन व्याख्यान दिया।
डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव, जैव रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग, आईआईटी (बीएचयू) ने “एआई और आई पी आर की उभरती चुनौतियाँ” पर ऑनलाइन व्याख्यान दिया। डॉ. अश्विनी सिवाल, एसोसिएट प्रोफेसर, संयुक्त डीन (अनुसंधान) एवं समन्वयक, पेटेंट सेल, विधि संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय ने “कृषि में प्रौद्योगिकी व्यवसायीकरण” पर ऑनलाइन व्याख्यान दिया।
डॉ. एस. के. तिवारी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, आईसीएआर-आईआईवीआर ने “भारत में आईपीआर मुद्दे: संभावनाएं एवं करियर अवसर” पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. इंदिवर प्रसाद, वरिष्ठ वैज्ञानिक,आईसीएआर-आईआई वीआर ने किया और धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।





